नागौर में रिटायर्ड डॉक्टर ने साइबर ठगी में खोए 34 लाख रुपये
साइबर ठगी का नया मामला
नागौर: नागौर में एक रिटायर्ड चिकित्सक साइबर ठगी का शिकार हो गए हैं, जब ठगों ने उन्हें 'डिजिटल अरेस्ट' का भय दिखाकर 34 लाख रुपये की राशि हड़प ली। यह घटना 21 जनवरी 2026 को हुई, जिसने एक बार फिर साइबर अपराधियों के चालाक तरीकों को उजागर किया है।
कैसे हुआ ठगी का खेल?
डॉक्टर को एक कॉल आई, जिसमें कॉलर ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके खिलाफ गंभीर आरोप लगाए जाने वाले हैं। ठगों ने उन पर मानव तस्करी और अश्लीलता जैसे गंभीर आरोप लगाए, जिससे डॉक्टर घबरा गए। पहले तो उन्हें संदेह हुआ, लेकिन ठगों की बातचीत और माहौल इतना वास्तविक था कि वे उनके झांसे में आ गए।
डॉक्टर ने पैसे क्यों ट्रांसफर किए?
बदनामी के डर से डॉक्टर मानसिक दबाव में आ गए। ठगों ने उन्हें आश्वासन दिया कि यदि वे जांच के नाम पर पैसे ट्रांसफर कर देंगे, तो मामला समाप्त हो जाएगा। इसी डर के चलते डॉक्टर ने अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट तुड़वाई और 34 लाख रुपये ठगों के बताए खाते में भेज दिए।
पुलिस की कार्रवाई
कुछ समय बाद जब कॉल आना बंद हो गया, तब डॉक्टर को एहसास हुआ कि वे ठगी का शिकार हो चुके हैं। उन्होंने तुरंत साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बैंक से संपर्क कर 5.54 लाख रुपये की राशि होल्ड करवा दी, लेकिन बाकी रकम ठग निकाल चुके थे। नागौर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और तकनीकी विश्लेषण के जरिए आरोपियों का पता लगाया।
करीब 15 दिनों की जांच के बाद पुलिस ने दिल्ली में छापेमारी कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों की पहचान इमरान, विवेक कुमार, सलमान और योगेंद्र के रूप में हुई है। जांच में पता चला कि ये लोग फर्जी फर्म बनाकर बैंक खाते खोलते थे और ठगी की रकम इन्हीं खातों में मंगवाकर तुरंत निकाल लेते थे।
सावधानी बरतें
यदि आपको कभी ऐसा संदिग्ध कॉल प्राप्त होता है, तो घबराने के बजाय तुरंत 1930 पर साइबर हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।