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राजस्थान में लापता बच्चे प्रिंस की हत्या का मामला: चाचा-चाची पर आरोप

राजस्थान के दौसा जिले में चार साल के प्रिंस की लापता होने की कहानी एक दर्दनाक मोड़ ले चुकी है। उसके चाचा और चाची पर हत्या का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने गहन जांच के बाद इस मामले का खुलासा किया है। प्रिंस के परिवार ने न्याय की उम्मीद जताई है, जबकि जांच में आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। जानें इस मामले की पूरी कहानी और परिवार की भावनाएं।
 

दौसा में प्रिंस की दर्दनाक कहानी


जयपुर: राजस्थान के दौसा जिले से 16 अगस्त 2020 को लापता हुए चार वर्षीय प्रिंस उर्फ टिल्लू की कहानी का अंत अत्यंत दुखद रहा। वह अपने घर के आंगन में खेलते समय अचानक गायब हो गया। उसके परिवार ने उसे खोजने के लिए हर संभव प्रयास किया, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। अंततः 2021 में हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई, जिसके बाद जांच में तेजी आई। इस जटिल मामले में सात जांच अधिकारियों का बदलाव हुआ, लेकिन राजस्थान पुलिस ने हार नहीं मानी और लगभग पांच साल बाद इस रहस्य का खुलासा किया।


हत्या का खुलासा और जांच की प्रक्रिया

पुलिस ने जांच में पाया कि प्रिंस की हत्या कर उसे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के पास दफनाया गया था। शव की सही लोकेशन का पता लगाने के लिए दिल्ली से 'ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार' (GPR) मशीन मंगवाई गई है। इस तकनीक ने जमीन के लगभग 9 मीटर (30 फीट) नीचे कुछ संकेतों को पकड़ा है। इन संकेतों के आधार पर दो जेसीबी मशीनें पिछले तीन दिनों से खुदाई कर रही हैं। अब तक लगभग 15 फीट खुदाई की जा चुकी है, लेकिन एक्सप्रेसवे की मिट्टी और गहराई के कारण शव की बरामदगी में कठिनाइयाँ आ रही हैं।


परिवार का विश्वासघात

अपनों का विश्वासघात और रंजिश 


सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि प्रिंस की हत्या उसके चाचा अनिल और चाची कृष्णा ने की थी। पुलिस के अनुसार, पुरानी रंजिश के चलते उन्होंने यह अपराध किया। दोनों संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया गया है और पूछताछ के दौरान उन्होंने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने उन्हें 1 मार्च तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। प्रिंस के भाई-बहनों ने बताया कि शक से बचने के लिए अनिल और कृष्णा ने गायब होने के बाद खुद भी उसे खोजने का नाटक किया।


प्रिंस के पिता की प्रतिक्रिया

प्रिंस के पिता जगमोहन बैरवा, जो दुबई में काम करते थे, 21 फरवरी को इस घटना की जानकारी मिलते ही भारत लौट आए। उन्होंने आंसुओं के साथ कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। घर का आंगन आज भी खाली है, जहां कभी प्रिंस की शरारतें गूंजती थीं। आंगन में खड़ा नीम का पेड़ आज भी उसी उम्र का है, जितनी उम्र का प्रिंस आज होता। उसकी बड़ी बहन अर्चना और भाई समर आज भी उस विश्वासघात को याद कर कांप उठते हैं, जिसे उनके सगे चाचा ने अंजाम दिया।