राजस्थान सरकार ने प्रशासनिक अनुशासन के खिलाफ उठाए सख्त कदम
मुख्यमंत्री का बड़ा निर्णय
जयपुर: राजस्थान की सरकार ने प्रशासनिक जवाबदेही और अनुशासन को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के एक अधिकारी, राजस्थान पुलिस सेवा के दो अधिकारियों और अन्य सरकारी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय और अनुशासनात्मक कार्रवाई को मंजूरी दी है।
दहेज उत्पीड़न मामले में कार्रवाई
इसके साथ ही, दहेज उत्पीड़न के मामले में दोषी पाए गए एक चिकित्सा अधिकारी को सरकारी सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय लिया गया है। सरकार का कहना है कि प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए यह कार्रवाई की जा रही है।
आरोपों की जानकारी
क्या लगा है आरोप?
एक आईएएस अधिकारी पर बिना नीलामी के मूल्यवान सरकारी भूमि आवंटित करने का आरोप है। मुख्यमंत्री ने इस मामले में अखिल भारतीय सेवाएं अनुशासन एवं अपील नियम 1969 के तहत विभागीय कार्रवाई की मंजूरी दी है, लेकिन संबंधित अधिकारी का नाम अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।
उप अधीक्षक सरोज बिश्नोई पर कार्रवाई
उप अधीक्षक सरोज बिश्नोई पर क्या लिया गया एक्शन?
जयपुर के महिला बंदी सुधार गृह में तैनात उप अधीक्षक सरोज बिश्नोई को तुरंत निलंबित कर दिया गया है। उनका मुख्यालय जयपुर से भरतपुर स्थानांतरित किया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने एक महिला बंदी को सरकारी कार्यों में हस्तक्षेप करने दिया और नियमों का उल्लंघन करते हुए धन लेकर कुछ बंदियों को विशेष सुविधाएं प्रदान कीं।
मुख्यमंत्री का एक्शन
मुख्यमंत्री ने क्या लिया एक्शन?
मुख्यमंत्री ने जोधपुर में साइबर अपराध शाखा के सहायक पुलिस आयुक्त देरावर सिंह के खिलाफ भी कार्रवाई को मंजूरी दी है। उन पर आरोप है कि डीग जिले के कामां थानाधिकारी रहते हुए उन्होंने एक हत्या के मामले की जांच में लापरवाही बरती और सात आरोपियों को बचाने का प्रयास किया।
अन्य अधिकारियों पर कार्रवाई
चिकित्सा अधिकारी पर क्या लिया गया एक्शन?
सरकार ने दहेज उत्पीड़न के मामले में दोषी पाए गए एक चिकित्सा अधिकारी को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया है। इसके अलावा, राजस्थान सिविल सेवा के दो अधिकारियों की वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने और एक सेवानिवृत्त पशु चिकित्सा अधिकारी की पेंशन का 20 प्रतिशत हिस्सा स्थायी रूप से रोकने का निर्णय भी लिया गया है।