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अनाटएड समिट 2026: चिकित्सा शिक्षा में नवाचार और चुनौतियों पर चर्चा

नई दिल्ली में आयोजित अनाटएड समिट 2026 में चिकित्सा शिक्षा के नवाचार और चुनौतियों पर चर्चा की गई। इस सम्मेलन में देश-विदेश के प्रमुख चिकित्सा शिक्षकों ने भाग लिया और शरीर रचना विज्ञान की शिक्षा को अधिक प्रभावी बनाने के तरीकों पर विचार किया। विशेषज्ञों ने सीबीएमई के अंतर्गत मूल्यांकन के तरीकों, पीढ़ी-जेड विद्यार्थियों के लिए शिक्षण रणनीतियों और एआई तकनीकों के उपयोग पर चर्चा की। इस सम्मेलन ने चिकित्सा शिक्षा में साक्ष्य आधारित पद्धतियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
 

नई दिल्ली में अनाटएड समिट 2026 का उद्घाटन


नई दिल्ली: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एआईआईएमएस) नई दिल्ली में शुक्रवार को 'अनाटएड समिट 2026' का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का विषय था 'एनाटॉमी शिक्षा का पुनर्कल्पन—शिक्षण, अधिगम और मूल्यांकन की नवाचारी रणनीतियां', जिसमें देश-विदेश के प्रमुख चिकित्सा शिक्षकों और शरीर रचना विज्ञान के विशेषज्ञों ने भाग लिया।


चिकित्सा शिक्षा में बदलाव और नई चुनौतियों पर चर्चा

इस सम्मेलन का आयोजन एआईआईएमएस के शरीर रचना विज्ञान विभाग द्वारा किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य दक्षताधारित चिकित्सा शिक्षा (सीबीएमई) के संदर्भ में शरीर रचना विज्ञान की शिक्षा को अधिक प्रभावी और छात्र-केंद्रित बनाना है।


विशेषज्ञों ने चिकित्सा शिक्षा के बदलते स्वरूप, पूर्व-नैदानिक विषयों की नई भूमिका और चिकित्सा शिक्षा में शोध की उपयोगिता पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने कहा कि अब केवल पारंपरिक शिक्षण विधियों से काम नहीं चलने वाला है। विद्यार्थियों की आवश्यकताओं और तकनीकी परिवर्तनों के अनुसार शिक्षण विधियों में बदलाव आवश्यक है।


सीबीएमई में एनाटॉमी के मूल्यांकन पर चर्चा

सम्मेलन के दौरान दक्षताधारित चिकित्सा शिक्षा के अंतर्गत शरीर रचना विज्ञान के मूल्यांकन तरीकों पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने वर्तमान मूल्यांकन प्रणाली की उपयोगिता और उसमें सुधार की आवश्यकता पर अपने विचार साझा किए।


उन्होंने यह भी बताया कि मूल्यांकन का उद्देश्य केवल ज्ञान की परीक्षा नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह देखना भी जरूरी है कि विद्यार्थी अपने ज्ञान का व्यावहारिक उपयोग कैसे कर रहे हैं।


पीढ़ी-जेड विद्यार्थियों के लिए शिक्षण रणनीतियाँ

सम्मेलन में पीढ़ी-जेड के विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षण विधियों से जोड़ने पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि आज के विद्यार्थी डिजिटल तकनीक के प्रति अधिक सहज हैं, इसलिए कक्षाओं में संवादात्मक शिक्षण और तकनीकी उपकरणों का उपयोग बढ़ाना चाहिए।


इसके अलावा, पाठ्यक्रम में सुधारों को कक्षा में प्रभावी ढंग से लागू करने की चुनौतियों पर भी विचार किया गया।


एआई तकनीकों का लाइव प्रदर्शन

समिट का एक प्रमुख आकर्षण एआई आधारित उपकरणों का लाइव प्रदर्शन था, जिसने स्नातक स्तर पर शरीर रचना विज्ञान के शिक्षण को रोचक और इंटरैक्टिव बनाने के नए तरीकों को प्रदर्शित किया।


विशेषज्ञों ने बताया कि तकनीक का सही उपयोग विद्यार्थियों को जटिल शारीरिक संरचनाओं को समझने में मदद कर सकता है, लेकिन शिक्षकों की भूमिका और प्रमाणित शिक्षण विधियों का महत्व भी बना रहना चाहिए।


देशभर से शिक्षक और विद्यार्थी शामिल

अनाटएड समिट 2026 में विभिन्न चिकित्सा संस्थानों से फैकल्टी सदस्य, स्नातकोत्तर विद्यार्थी और चिकित्सा शिक्षा में रुचि रखने वाले प्रतिभागी शामिल हुए। संवादात्मक सत्रों में प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपने अनुभव साझा किए।


आयोजकों के अनुसार, सम्मेलन में भागीदारी यह दर्शाती है कि शरीर रचना विज्ञान की शिक्षा को आधुनिक बनाने के प्रति चिकित्सा शिक्षकों में रुचि बढ़ रही है।


साक्ष्य आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर

सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया गया कि चिकित्सा शिक्षा में बदलाव केवल नई तकनीकों तक सीमित नहीं होने चाहिए। शिक्षण की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए साक्ष्य आधारित शैक्षणिक पद्धतियों और बेहतर मूल्यांकन रणनीतियों को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।


विशेषज्ञों ने कहा कि शरीर रचना विज्ञान चिकित्सा शिक्षा की नींव है, इसलिए इसे पढ़ाने के तरीकों में नवाचार के साथ-साथ विद्यार्थियों की समझ और चिकित्सकीय कौशल को विकसित करने पर ध्यान देना आवश्यक है।