अमिताभ ठाकुर का नया विवाद: पुलिस की संपत्ति जब्ती पर उठे सवाल
देवरिया में नया मामला
देवरिया: पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर से संबंधित एक नया मामला सामने आया है, जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली और संपत्ति जब्ती की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। देवरिया कोतवाली पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी के समय कुछ सामान जब्त किए थे, जिनमें नकदी, मोबाइल फोन और एक टूथपेस्ट शामिल थे, लेकिन ये सभी सामान पूरी तरह से वापस नहीं किए गए।
गिरफ्तारी के समय जब्त सामान
अधिवक्ता प्रवीण द्विवेदी के अनुसार, 9 और 10 दिसंबर की रात शाहजहांपुर से गिरफ्तार किए गए अमिताभ ठाकुर के पास लगभग 42,000 रुपये नकद, दो एंड्रॉयड मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, कपड़े और टूथपेस्ट थी। गिरफ्तारी के बाद, देवरिया कोतवाली पुलिस ने इन सभी सामानों को जब्त कर लिया। हालांकि, लौटाए जाने पर केवल 7,208 रुपये ही वापस किए गए, और दो में से एक मोबाइल फोन अनलॉक स्थिति में मिला, जबकि गिरफ्तारी के समय वह पिन लॉक था।
टूथपेस्ट का मामला क्यों है गंभीर?
हालांकि यह मामूली प्रतीत होता है, लेकिन अधिवक्ताओं और समर्थकों का कहना है कि टूथपेस्ट का न लौटाना संदेह पैदा करता है। प्रवीण द्विवेदी ने कहा कि यदि साधारण सामान भी लौटाए नहीं गए, तो छेड़छाड़ या अनुचित उपयोग की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
मोबाइल फोन का अनलॉक होना
लौटाए गए वीवो फोन का अनलॉक होना विशेष चिंता का विषय है, क्योंकि इस फोन से यूपीआई और अन्य डिजिटल सेवाएं संचालित होती थीं। समर्थकों का कहना है कि फोन को खोला गया या उसमें कोई छेड़छाड़ हुई हो सकती है, जो निजता और कानूनी प्रक्रिया पर सीधे सवाल खड़ा करता है।
पुराना विवाद
यह मामला उस पुराने विवाद से जुड़ा है जिसमें अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी नूतन देवी पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग कर इंडस्ट्रियल एरिया में भूमि का आवंटन धोखाधड़ी से किया। इसी प्रकरण में उनके खिलाफ देवरिया कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ था और उन्हें गिरफ्तार किया गया था।
कोर्ट में मामला दर्ज
अमिताभ ठाकुर के समर्थक भीमसेन राव ने देवरिया की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) कोर्ट में वाद दायर किया है। इस वाद में पुलिस से मामले की रिपोर्ट तलब करने और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की मांग की गई है। कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 23 जनवरी तय की है।
23 जनवरी की सुनवाई इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह देखना बाकी है कि कोर्ट किस दिशा में रुख अपनाता है और पुलिस अपनी ओर से क्या जवाब देती है। एक साधारण-सी दिखने वाली टूथपेस्ट ने पूरे प्रकरण को चर्चा में ला दिया है, जो पुलिस प्रक्रिया की पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों के सवाल उठाती है।