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अयोध्या में श्रीराम मंदिर की सुरक्षा में तकनीकी बदलाव: AI और स्मार्ट सेंसर का होगा इस्तेमाल

अयोध्या में श्रीराम मंदिर की सुरक्षा को आधुनिक तकनीक से सुसज्जित करने की योजना बनाई जा रही है। दान राशि प्रबंधन में आई विसंगतियों के बाद, मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा में AI, डेटा एनालिसिस और रियल-टाइम सर्विलांस सिस्टम का समावेश करने का निर्णय लिया है। नए सुरक्षा ढांचे में 25 वॉच टावर और स्मार्ट सेंसर शामिल होंगे, जिससे संदिग्ध गतिविधियों की पहचान और त्वरित कार्रवाई संभव होगी। इस बदलाव का मुख्य कारण हाल ही में सामने आया दान गिनती केंद्र में चोरी का मामला है। आगामी उच्च स्तरीय बैठक में इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी दी जाएगी।
 

लखनऊ में सुरक्षा व्यवस्था का नया अध्याय

लखनऊ: अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर की सुरक्षा को अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़ाते हुए पूरी तरह से आधुनिक और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की योजना बनाई जा रही है। हाल ही में दान राशि प्रबंधन में आई विसंगतियों और सुरक्षा में कमी के चलते, मंदिर प्रशासन और उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी रणनीति में बदलाव करने का निर्णय लिया है। नए सुरक्षा ढांचे में, मंदिर की सुरक्षा का मुख्य आधार केवल सुरक्षाकर्मी नहीं होंगे, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा विश्लेषण और रियल-टाइम इंटेलिजेंट सर्विलांस सिस्टम भी शामिल होंगे। जिला प्रशासन ने इस संबंध में एक विस्तृत प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा है।


AI कैमरों से संदिग्ध गतिविधियों की पहचान

संदिग्ध हरकतों को तुरंत भांपेंगे एआई कैमरे

परिसर की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पहले से स्थापित सीसीटीवी कैमरों को AI तकनीक से अपग्रेड किया जाएगा। ये उन्नत कैमरे सामान्य वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ-साथ, भीड़ में किसी संदिग्ध गतिविधि की पहचान करने, किसी व्यक्ति के असामान्य व्यवहार का विश्लेषण करने और श्रद्धालुओं की संख्या का रियल-टाइम आकलन करने में सक्षम होंगे। किसी भी प्रकार की गड़बड़ी का आभास होते ही यह सिस्टम सुरक्षा कंट्रोल रूम और तैनात कर्मियों को तुरंत डिजिटल अलर्ट भेजेगा, जिससे त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी।


सुरक्षा चक्र में वॉच टावर और स्मार्ट सेंसर

25 वॉच टावर और स्मार्ट सेंसरों का सुरक्षा चक्र

मंदिर के चारों ओर सुरक्षा दीवार के साथ कुल 25 वॉच टावर स्थापित करने की योजना है। लगभग 4 किलोमीटर लंबी इस बाउंड्रीवॉल का 400 मीटर हिस्सा तैयार हो चुका है, जिसमें 3 वॉच टावर भी बन चुके हैं। इन टावरों की ऊंचाई 25 से 37 फीट के बीच होगी, जिससे पूरे मंदिर परिसर और उसके आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखी जा सकेगी। इसके साथ ही, इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा उपकरण और स्मार्ट सेंसर पूरे नेटवर्क की क्षमता को कई गुना बढ़ा देंगे।


नई रणनीति और अधिकारियों का रोटेशन

चढ़ावा प्रकरण के बाद बदली रणनीति और अफसरों का रोटेशन

सुरक्षा में इस बड़े तकनीकी बदलाव का मुख्य कारण हाल ही में दान गिनती केंद्र में सामने आया कथित चोरी का मामला है। विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट में एक महीने से अधिक की सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद लगभग 70 संदिग्ध घटनाओं का खुलासा हुआ है। जांच में पाया गया कि SOP का उल्लंघन, कमजोर तलाशी व्यवस्था और कैश काउंटिंग के दौरान निगरानी का अभाव जैसी बड़ी कमियां थीं।


संस्थागत निगरानी में सुधार

संस्थागत निगरानी प्रभावित हुई

इस प्रकरण से सबक लेते हुए अधिकारियों की तैनाती को लेकर सख्त नीति बनाई जा रही है। पहले संवेदनशील पदों पर लंबे समय तक एक ही अधिकारी के टिके रहने से संस्थागत निगरानी प्रभावित हुई थी, जिसे देखते हुए अब महत्वपूर्ण सुरक्षा और निगरानी पदों पर नियमित तबादला और जिम्मेदारियों के रोटेशन की नीति लागू करने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।


उच्च स्तरीय बैठक में प्रस्ताव पर मुहर

उच्च स्तरीय बैठक में लगेगी मुहर

राममंदिर की सुरक्षा की समीक्षा के लिए हर तीन महीने में एक उच्च स्तरीय कमेटी की बैठक आयोजित की जाती है। अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आगामी बैठक में इस नए तकनीकी प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी देकर काम को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। इस बैठक में एडीजी सुरक्षा, एडीजी जोन, IB के निदेशक, और सीआरपीएफ (CRPF) व एसएसएफ (SSF) के कमांडेंट शामिल होंगे। उत्तर प्रदेश सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स (SSF) की छठी बटालियन के तहत 1,155 स्थायी पदों के सृजन को मंजूरी दे दी है, जिसमें कमांडेंट से लेकर तकनीकी व प्रशासनिक स्टाफ शामिल हैं।