इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों पर मंत्री का विवादित बयान
राजीव रंजन तिवारी का संपादकीय
Editorial | राजीव रंजन तिवारी | नेताओं की बातों में विश्वास करना अब मुश्किल हो गया है। सच्चाई की कमी और झूठे वादों के बीच, इंदौर का हाल एक बार फिर चर्चा में है। हाल ही में, दूषित पानी के कारण हुई मौतों ने राज्य सरकार की किरकिरी कर दी है। इंदौर, जो कि स्वच्छता में अव्वल रहा है, अब गंभीर संकट का सामना कर रहा है।
मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पत्रकारों के सवालों पर आपा खो दिया। जब उनसे पूछा गया कि क्यों केवल जूनियर अधिकारियों पर जिम्मेदारी डाली जा रही है, तो उन्होंने अनावश्यक प्रश्न पूछने की बात कही। इस पर पत्रकार ने अपनी बात जारी रखी, जिससे मंत्री और भी भड़क गए।
विजयवर्गीय ने बाद में अपने शब्दों के लिए खेद व्यक्त किया और कहा कि वह प्रभावित क्षेत्र की स्थिति सुधारने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। इस बीच, कांग्रेस ने मुख्यमंत्री से विजयवर्गीय का इस्तीफा मांगने की बात कही है।
इंदौर में कम से कम 10 लोगों की मौतें हुई हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में चार मौतों का उल्लेख किया गया है। इस त्रासदी का सबसे छोटा शिकार एक छह महीने का बच्चा था, जो अपने माता-पिता के लिए एक दशक का इंतजार था।
कैलाश विजयवर्गीय का विवादित बयान और उनकी भड़काऊ टिप्पणियाँ अक्सर चर्चा का विषय बनती हैं। उन्हें अपनी शैली में सुधार करने की आवश्यकता है, ताकि वे एक लोकतांत्रिक नेता की छवि प्रस्तुत कर सकें।