इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को दी राहत, गिरफ्तारी पर लगी रोक
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को मिली राहत
नई दिल्ली: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को एक महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है। शुक्रवार को हुई सुनवाई में अदालत ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। यह मामला पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज किया गया है, जिसमें नाबालिगों से संबंधित गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अदालत ने अग्रिम जमानत की याचिका पर निर्णय सुरक्षित रखा है, लेकिन आदेश आने तक पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकेगी।
कोर्ट की सुनवाई का विवरण
जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने इस संवेदनशील मामले की सुनवाई की। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के वकीलों ने अपनी दलीलें प्रस्तुत कीं।
स्वामी के वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता दिलीप कुमार ने शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी की आपराधिक पृष्ठभूमि का उल्लेख किया और एफआईआर की सामग्री पर सवाल उठाए। उन्होंने यह भी बताया कि एक बच्चे की मार्कशीट में उसकी उम्र बालिग दर्शाई गई है।
वहीं, शिकायतकर्ता के वकील ने अग्रिम जमानत का विरोध किया। सरकारी पक्ष से अपर महाधिवक्ता ने भी जमानत देने पर आपत्ति जताई। सभी दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा और फिलहाल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। अदालत ने स्वामी को जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश भी दिया है।
विवाद की शुरुआत
यह विवाद प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज एफआईआर से संबंधित है। दो बटुकों की शिकायत पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया।
शुरुआत में पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की, जिसके बाद शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने सीआरपीसी की धारा 173(4) के तहत जिला अदालत में याचिका दायर की। रेप एंड पॉक्सो स्पेशल कोर्ट के जज विनोद कुमार चौरसिया के आदेश पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की।
हाई कोर्ट का रुख
इसके बाद स्वामी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाई कोर्ट का रुख किया। उन्होंने आरोपों को पूरी तरह से निराधार बताया और इसे सत्ता पक्ष का षड़यंत्र करार दिया। स्वामी का कहना है कि पीड़ित बताए जा रहे बच्चे लंबे समय से आशुतोष ब्रह्मचारी के पास रह रहे हैं। उन्होंने 17 जनवरी की कथित घटना को भी झूठा बताया और सवाल उठाया कि जांच के दौरान शिकायतकर्ता पुलिस के साथ क्यों मौजूद रहता है।
कोर्ट के आदेश से पुलिस अब स्वामी को तुरंत गिरफ्तार नहीं कर सकेगी, लेकिन जांच जारी रहेगी। यह मामला अत्यंत संवेदनशील है, इसलिए कानूनी विशेषज्ञों और आम जनता की नजरें इस पर टिकी हुई हैं। अग्रिम जमानत पर अंतिम निर्णय आने में समय लग सकता है। फिलहाल स्वामी को राहत मिली है, लेकिन जांच पूरी होने तक स्थिति स्पष्ट नहीं है।