ईरान की चेतावनी: खाड़ी देशों में अमेरिकी सैनिकों के ठिकानों को वैध सैन्य लक्ष्य माना जाएगा
मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव
नई दिल्ली - मध्य पूर्व में जारी संघर्ष की स्थिति और भी गंभीर होती जा रही है। इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है। तीनों पक्ष लगातार एक-दूसरे के ठिकानों पर हमले कर रहे हैं, जिससे तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है।
ईरान की सख्त चेतावनी
इस बीच, ईरान ने खाड़ी देशों, विशेषकर बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात के होटल मालिकों को एक गंभीर चेतावनी दी है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि यदि उनके होटलों में अमेरिकी सैन्यकर्मियों को ठहराया जाता है, तो ऐसे प्रतिष्ठानों को “वैध सैन्य लक्ष्य” माना जाएगा।
अमेरिकी सैन्य गतिविधियों का विस्तार
ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘फार्स’ के अनुसार, हालिया हमलों के बाद अमेरिकी सेना ने क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बनाए रखने के लिए कई नागरिक होटलों और ठिकानों का सहारा लिया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिकी सैन्य गतिविधियां अब पारंपरिक सैन्य अड्डों के अलावा नागरिक इलाकों में भी फैल रही हैं।
चेतावनी का दायरा
अन्य अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, यह चेतावनी केवल खाड़ी देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन सभी स्थानों पर लागू है जहां विदेशी सैन्यकर्मियों को पनाह दी जा रही है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि ऐसी गतिविधियों के जारी रहने पर तुरंत कार्रवाई की जा सकती है।
संवेदनशील क्षेत्रों में अमेरिकी उपस्थिति
रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि अमेरिकी सैन्यकर्मी मध्य पूर्व के कई संवेदनशील और नागरिक क्षेत्रों में मौजूद हैं, जिनमें बेरूत, दमिश्क और अन्य प्रमुख शहरों के होटल शामिल हैं। इसके अलावा, जिबूती में भी अमेरिकी मरीन की तैनाती की खबरें आई हैं।
अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन
इससे पहले, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने आरोप लगाया था कि अमेरिकी सेना अपने पारंपरिक सैन्य ठिकानों को छोड़कर नागरिक क्षेत्रों का इस्तेमाल कर रही है और स्थानीय नागरिकों को ढाल बना रही है। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया।
संघर्ष का बढ़ता खतरा
हाल ही में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई शहरों पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई की थी, जिसके बाद से क्षेत्र में संघर्ष और तेज हो गया है। जवाब में, ईरान ने भी मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए पलटवार किया है और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है।
विशेषज्ञों की चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात इसी तरह बिगड़ते रहे, तो यह संघर्ष पूरे मध्य पूर्व को एक बड़े युद्ध की ओर धकेल सकता है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल आपूर्ति पर भी पड़ेगा।