उत्तराखंड में MBBS सीटों पर फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा: क्या हैं सच्चाई के पीछे के राज?
उत्तराखंड में MBBS सीटों पर गंभीर आरोप
नई दिल्ली: उत्तराखंड में डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले हजारों छात्रों के बीच एक बड़ा सवाल उठ रहा है: क्या MBBS की कई सीटें फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से हासिल की गईं? NEET UG की प्रवेश प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगे हैं कि छात्रों ने नकली स्थायी निवास और श्रेणी प्रमाण पत्र बनवाकर सीटें प्राप्त कीं। अनुमान है कि लगभग 370 छात्रों को संदिग्ध प्रमाण पत्रों का लाभ मिला है।
प्रदीप बहुगुणा की शिकायत से शुरू हुआ मामला
यह मामला तब प्रकाश में आया जब देहरादून के निवासी प्रदीप बहुगुणा ने स्वास्थ्य मंत्री को कथित गड़बड़ियों की एक सूची सौंपी। प्रदीप, पर्यावरणविद और पद्म श्री से सम्मानित सुंदरलाल बहुगुणा के पुत्र हैं। शिकायत के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने जिला मजिस्ट्रेट को एक सप्ताह के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश दिया, लेकिन अब तक जिला मजिस्ट्रेट की ओर से कोई सार्वजनिक बयान नहीं आया है।
विशेष जांच दल का गठन
आरोपों की जांच के लिए एसएसपी स्तर के अधिकारियों की अगुवाई में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। इस टीम ने फर्जी स्वतंत्रता सेनानी प्रमाण पत्र बनाने वाले एक गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा, उधम सिंह नगर में भी फर्जी प्रमाण पत्रों से संबंधित बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों का पता चला है।
जांच के दायरे पर उठे सवाल
बहुगुणा का आरोप है कि एसआईटी की जांच मुख्य रूप से "स्वतंत्रता सेनानी आश्रित" प्रमाण पत्रों तक सीमित है। उन्होंने मांग की है कि उन उम्मीदवारों की भी जांच की जाए जिन्होंने कथित तौर पर नकली स्थायी निवास प्रमाण पत्र बनवाकर उत्तराखंड के निवासियों के लिए आरक्षित सीटें हासिल कीं। यह भी आरोप है कि एक ही परिवार के सदस्यों को विभिन्न श्रेणियों में प्रमाण पत्र जारी किए गए ताकि उन्हें प्रवेश में लाभ मिल सके।
संदिग्ध प्रमाण पत्रों की जांच
जांच में एसडीएम (सदर) द्वारा अंतिम समय में जारी किए गए 36 संदिग्ध प्रमाण पत्र भी शामिल हैं। आरोप है कि कई मामलों में एक स्थायी निवास और एक उप-श्रेणी का, यानी दो अलग प्रमाण पत्र जारी हुए, लेकिन रिकॉर्ड में केवल एक का संदर्भ क्रमांक दर्ज किया गया। बहुगुणा का कहना है कि असली आंकड़ा 36 से अधिक हो सकता है।
रद्द प्रमाण पत्रों की भी हो जांच
बहुगुणा के अनुसार, देहरादून के एसडीएम (सदर) द्वारा जारी कई स्थायी निवास और स्वतंत्रता सेनानी प्रमाण पत्र बाद में रद्द किए जा चुके हैं। उन्होंने मांग की है कि स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रितों को दिए गए प्रमाण पत्रों का रिकॉर्ड भी खंगाला जाए। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जांच केवल लाभ लेने वाले छात्रों तक सीमित न रहे, बल्कि आवेदन और सत्यापन से लेकर प्रमाण पत्र जारी होने और मेडिकल कॉलेज में दाखिले तक पूरी प्रक्रिया की जांच हो।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस मुद्दे ने राज्य में राजनीतिक हलचल भी पैदा कर दी है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का आरोप है कि कार्रवाई मुख्य रूप से निचले स्तर के कर्मचारियों पर हो रही है, जबकि प्रभावशाली लोगों को बचाया जा रहा है। उनका दावा है कि उत्तराखंड में फर्जी प्रमाण पत्र बनाने का सिलसिला पिछले सात-आठ साल से चल रहा है। जांच जारी है, और प्रमाण पत्रों व मेडिकल प्रवेश दस्तावेजों की गहन पड़ताल से ही गड़बड़ी की असली तस्वीर सामने आएगी।