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उत्तराखंड में श्रमिकों के लिए नई आर्थिक सुरक्षा योजना: DBT से सीधे लाभ

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गरीब और असंगठित श्रमिकों के लिए एक नई आर्थिक सुरक्षा योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत, श्रमिकों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में सहायता राशि भेजी जा रही है। पिछले एक वर्ष में हजारों श्रमिकों को 93.06 करोड़ रुपये की सहायता मिली है। इस पहल से श्रमिकों को न केवल आर्थिक मदद मिल रही है, बल्कि उन्हें सम्मान और सुरक्षा की भावना भी मिल रही है। जानें इस योजना के तहत दी जा रही सहायता के प्रकार और इसके लाभ।
 

मुख्यमंत्री की नई पहल


देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के गरीब और असंगठित श्रमिकों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक महत्वपूर्ण योजना की शुरुआत की है। इसे श्रमिक कल्याण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार ने बिचौलियों की भूमिका को समाप्त करते हुए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सहायता राशि सीधे श्रमिकों के बैंक खातों में भेजने का कार्य शुरू किया है।


आर्थिक सहायता का वितरण

पिछले एक वर्ष में, 24,323 से अधिक पंजीकृत श्रमिकों और उनके परिवारों को 93.06 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता सीधे हस्तांतरित की गई है। हाल ही में, मुख्यमंत्री की उपस्थिति में एक कार्यक्रम में उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के माध्यम से 4,400 से ज्यादा श्रमिकों के खातों में लगभग 11 करोड़ रुपये की राशि DBT मोड में ट्रांसफर की गई।


सहायता के क्षेत्र

सहायता किन-किन क्षेत्रों में दी जा रही है?


- बेटियों की शादी के लिए विवाह सहायता


- परिवार के सदस्य की असामयिक मृत्यु पर आर्थिक सहयोग


- महिला श्रमिकों को मातृत्व लाभ


- बच्चों की पढ़ाई के लिए शैक्षणिक सहायता


- अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाएं


निर्माण क्षेत्र में अधिकांश श्रमिक असंगठित होते हैं, जिनकी आय अनियमित होती है। शादी, बीमारी, दुर्घटना या मृत्यु जैसी घटनाएं परिवार को आर्थिक संकट में डाल सकती हैं। ऐसे में सरकार की यह सीधी सहायता परिवारों के लिए संकट के समय सहारा बन रही है।


कार्यस्थल पर सुविधाएं

कार्यस्थल पर ही पहुंच रही सुविधाएं


मुख्यमंत्री धामी ने निर्देश दिया है कि श्रमिकों को लाभ लेने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। भौगोलिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, सरकार वर्कप्लेस वेलफेयर कैंप आयोजित कर रही है। इन कैंपों के माध्यम से दूर-दराज के निर्माण स्थलों पर ही पंजीकरण, योजना का लाभ, स्वास्थ्य जांच और आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। इससे श्रमिकों का समय और पैसा दोनों बच रहा है।


पारदर्शिता और तकनीकी निगरानी

पारदर्शिता और तकनीकी निगरानी


सरकार ने डिजिटल सत्यापन प्रणाली को मजबूत किया है ताकि सहायता केवल पात्र और वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचे। फर्जी दावों और धांधली की रोकथाम के लिए सख्त नियम बनाए गए हैं। साथ ही, जिला स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी हकदार योजना से वंचित न रहे।


यह पहल न केवल श्रमिकों की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही है, बल्कि उन्हें सम्मान और सुरक्षा की भावना भी दे रही है। धामी सरकार का यह प्रयास राज्य के विकास में योगदान देने वाले हर श्रमिक के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।