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ऋषिकेश में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस: योग का संदेश और वैश्विक एकता

ऋषिकेश में 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में योग साधकों ने सामूहिक योगाभ्यास कर विश्व शांति और एकता का संदेश फैलाया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती और साध्वी भगवती सरस्वती ने योग के महत्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर कई देशों के राजदूतों और उच्चाधिकारियों ने भाग लिया, जिन्होंने भारत की प्राचीन योग परंपरा की सराहना की। जानें इस विशेष आयोजन की खास बातें और योग के माध्यम से मानवता के लिए क्या संदेश दिया गया।
 

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का उत्सव


उत्तराखंड: 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन का गंगा तट आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा हुआ था। भारत और अन्य देशों से आए योग साधकों ने यहां सामूहिक योगाभ्यास किया, जिससे योग की शक्ति और उसके वैश्विक महत्व का संदेश फैलाया गया। इस विशेष अवसर पर विदेशी राजदूतों, राजनयिकों और उच्चाधिकारियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी महत्वपूर्ण बना दिया। योग के माध्यम से विश्व शांति, सद्भाव और मानवता के एकजुट होने का संदेश दिया गया।


योग का महत्व: स्वामी चिदानन्द सरस्वती का दृष्टिकोण

परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने योग के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि यह केवल शारीरिक स्वास्थ्य का साधन नहीं है, बल्कि यह मन, आत्मा और चेतना को संतुलित करने की एक जीवन पद्धति है। उन्होंने बताया कि भारतीय ऋषियों द्वारा दिया गया यह ज्ञान आज पूरी दुनिया को स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा दे रहा है।


स्वामी जी ने कहा कि आज के समय में लोग तनाव, मानसिक दबाव, हिंसा और पर्यावरण संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में योग, ध्यान और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा मानवता को सही दिशा दिखाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उनके अनुसार, योग व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाता है और जीवन में सकारात्मकता लाता है।


साध्वी भगवती सरस्वती का संदेश

योग पूरी मानवता की साझा धरोहर है


इस अवसर पर साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि योग किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं है। यह पूरी मानवता के लिए भारत का एक अमूल्य उपहार है। उन्होंने बताया कि जब व्यक्ति स्वयं को बेहतर तरीके से समझता है, तभी वह प्रकृति, समाज और ईश्वर के साथ गहरा संबंध स्थापित कर पाता है। योग को जोड़ने वाली शक्ति बताते हुए उन्होंने कहा कि इसका संदेश एकता, सहयोग और आंतरिक शांति है।


विदेशी प्रतिनिधियों की उपस्थिति

भारत की योग परंपरा की सराहना


कार्यक्रम में विभिन्न देशों के राजदूतों, उच्चायुक्तों और राजनयिकों ने गंगा तट पर सामूहिक योगाभ्यास किया। उन्होंने भारत की प्राचीन योग परंपरा के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि योग ने विश्वभर के लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया है। विदेशी प्रतिनिधियों का मानना है कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से लोगों और देशों को करीब लाने का माध्यम है।


राजनयिकों की उपस्थिति


इस विशेष आयोजन में थाईलैंड के राजदूत एचई चवनार्ट थांगसुम्फांत, इजराइल की मानद वाणिज्यदूत जॉयश्री वर्मा, गुयाना के उच्चायुक्त धरमकुमार सीराज, सर्बिया के राजदूत सिनिशा पाविक, नेपाल के प्रभारी राजदूत डॉ. सुरेन्द्र थापा और बांग्लादेश के उच्चायुक्त एम. रियाज हमीदुल्लाह सहित कई देशों के वरिष्ठ राजनयिक और अधिकारी शामिल हुए। सभी ने योग के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए इसे वैश्विक कल्याण का प्रभावी माध्यम बताया।