करेले की खेती: किसानों के लिए लाभकारी विकल्प
करेले की खेती: किसानों की आमदनी का नया स्रोत
करेले की खेती: किसानों के लिए लाभकारी विकल्प: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में करेला उगाना किसानों के लिए एक लाभदायक विकल्प बन गया है। विशेष रूप से बिजुआ ब्लॉक के किसान कमलेश जैसे लोग दो बीघा जमीन पर करेला उगाकर अच्छी आमदनी कमा रहे हैं। बारिश के मौसम में यह फसल कम लागत में तैयार होती है और बाजार में इसकी कीमत ₹40 से ₹50 प्रति किलो तक होती है।
करेले की खेती के लिए किसान पारंपरिक तकनीकों का उपयोग करते हैं। रस्सी और बांस की मदद से मचान तैयार किया जाता है, जिससे पौधों को सहारा मिलता है और फल जल्दी आने लगते हैं। लगभग 60 दिनों में फसल तैयार हो जाती है, जिससे दो बीघा में करीब ₹1 लाख तक की कमाई संभव है।
कम लागत, अधिक लाभ: खेती का गणित समझें
(करेले की खेती) की सबसे बड़ी विशेषता इसकी कम लागत है। किसान बताते हैं कि दो बीघा में करेला उगाने में केवल ₹4,000 से ₹5,000 का खर्च आता है। इसके बाद 60 दिनों में फूल और फल आने लगते हैं। बाजार में इसकी निरंतर मांग बनी रहती है, जिससे मुनाफा सुनिश्चित होता है।
करेले की खेती में जैविक खाद, सिंचाई और थोड़ी मात्रा में रासायनिक खाद की आवश्यकता होती है। यदि इन बातों का ध्यान रखा जाए, तो यह कड़वी सब्जी मीठी कमाई का साधन बन जाती है। (करेले का लाभ) का यह मॉडल छोटे किसानों के लिए भी अत्यंत लाभकारी साबित हो रहा है।
करेला: औषधीय गुणों से भरपूर, बाजार में उच्च मांग
(करेले के फायदे) की बात करें तो यह सब्जी शुगर के मरीजों के लिए वरदान है। इसमें विटामिन A, B, C के साथ-साथ बीटा कैरोटीन, आयरन, ल्यूटिन, जिंक, पोटैशियम, मैग्नीशियम और मैंगनीज जैसे पोषक तत्व होते हैं। यही कारण है कि इसकी मांग सालभर बनी रहती है।