कर्नाटक उपचुनाव: ईवीएम चाबियों की गुमशुदगी से शुरू हुई मतगणना की प्रक्रिया
मतगणना की शुरुआत में अप्रत्याशित घटना
मतगणना का दिन आमतौर पर व्यस्त और संवेदनशील होता है, लेकिन कर्नाटक में इस बार एक अनपेक्षित घटना ने सबको चौंका दिया। सुबह-सुबह जब अधिकारी वोटों की गिनती के लिए तैयार हो रहे थे, तभी ईवीएम स्ट्रांगरूम की चाबियां गायब होने की सूचना आई। इस घटना ने प्रशासन में हड़कंप मचा दिया और मतगणना प्रक्रिया में देरी हो गई।
स्ट्रांगरूम में पहुंचने की कोशिश
स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि एक व्यक्ति को ताले तोड़ने के लिए हथौड़ा और छेनी लेकर आना पड़ा। सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में स्ट्रांगरूम तक पहुंचने का प्रयास किया गया, जहां दावणगेरे दक्षिण उपचुनाव से संबंधित वोट सुरक्षित रखे गए थे।
उपचुनाव का महत्व
दावणगेरे दक्षिण सीट पर उपचुनाव का आयोजन पूर्व विधायक शमनूर शिवशंकरप्पा के निधन के कारण किया गया। इसके साथ ही बागलकोट सीट पर भी उपचुनाव हुए, जिनकी मतगणना आज की जा रही है। हालांकि, इन दोनों सीटों के परिणाम सीधे तौर पर सरकार की स्थिति को प्रभावित नहीं करेंगे, लेकिन राजनीतिक दृष्टि से इनका महत्व काफी अधिक है।
कांग्रेस और भाजपा के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई
इन उपचुनावों को कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न माना जा रहा है। कांग्रेस अपनी दोनों सीटों को बनाए रखने की कोशिश कर रही है, जबकि भाजपा इन सीटों को जीतकर सत्ताधारी दल को झटका देना चाहती है। खासकर ऐसे समय में, जब कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर खींचतान की बातें सामने आ रही हैं।
मतदान प्रतिशत और रणनीति
चुनाव आयोग के अनुसार, बागलकोट में लगभग 68.74 प्रतिशत और दावणगेरे दक्षिण में करीब 68.43 प्रतिशत मतदान हुआ। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि मतदाताओं ने इन उपचुनावों में अच्छी भागीदारी दिखाई। भाजपा इन चुनावों के माध्यम से अपने कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरना चाहती है, ताकि 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले संगठन को मजबूत किया जा सके। दूसरी ओर, कांग्रेस के लिए इन सीटों को बचाना आवश्यक है, क्योंकि हार को सरकार के प्रदर्शन से जोड़ा जा सकता है।
उम्मीदवार और आंतरिक विवाद
दावणगेरे दक्षिण सीट पर कांग्रेस ने दिवंगत विधायक के पोते समर्थ को टिकट दिया। इस निर्णय के पीछे क्षेत्र में उनकी पकड़ और सहानुभूति को महत्वपूर्ण माना गया। हालांकि, चुनाव के बाद पार्टी के भीतर मतभेद भी सामने आए। कांग्रेस ने कुछ नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की, जिन पर आरोप था कि उन्होंने पार्टी उम्मीदवार को हराने की कोशिश की। इस मामले ने पार्टी के आंतरिक हालात को भी उजागर कर दिया।
नेताओं पर टिकी नजर
राज्य के आवास मंत्री बीजेड ज़मीर अहमद खान का नाम भी इस पूरे घटनाक्रम में चर्चा में है। ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि आने वाले समय में मंत्रिमंडल में फेरबदल के दौरान उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। ऐसे में दावणगेरे दक्षिण का चुनाव परिणाम उनके लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पिछले चुनावों का संदर्भ
अगर पिछले चुनाव की बात करें, तो 2023 में शमनूर शिवशंकरप्पा ने दावणगेरे दक्षिण सीट पर भाजपा उम्मीदवार बीजी अजय कुमार को 27,888 वोटों से हराया था। इस बार भी इसी सीट पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यहां का नतीजा राजनीतिक संदेश देने वाला माना जा रहा है।