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कल्याण-डोंबिवली चुनाव: शिवसेना और मनसे का नया गठबंधन, बीजेपी को चुनौती

महाराष्ट्र की राजनीति में कल्याण-डोंबिवली नगर निगम चुनावों ने एक नया मोड़ लिया है। एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने राज ठाकरे की मनसे के साथ गठबंधन किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य बीजेपी को मेयर पद से दूर रखना है। बीजेपी ने 50 सीटें जीतीं, लेकिन बहुमत से दूर है। महायुति के भीतर टकराव और अन्य नगर निकायों में भी गठबंधन की राजनीति देखने को मिल रही है। जानें इस राजनीतिक घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी।
 

राजनीति में नया मोड़


मुंबई : महाराष्ट्र की राजनीति में अक्सर अप्रत्याशित घटनाएं घटित होती हैं, और हाल के नगर निगम चुनावों ने इस बात को फिर से साबित कर दिया है। कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC) के चुनाव परिणामों ने राज्य में राजनीतिक समीकरणों को और जटिल बना दिया है। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने राज ठाकरे की मनसे के साथ अपने पुराने मतभेदों को भुलाते हुए एक नया गठबंधन किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य बीजेपी को मेयर पद से दूर रखना बताया जा रहा है।


बीजेपी का प्रदर्शन, लेकिन बहुमत से दूर

बीजेपी का मजबूत प्रदर्शन, फिर भी बहुमत नहीं
कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में कुल 122 सदस्य हैं, जिसमें बीजेपी ने 50 सीटें जीतीं, जबकि शिंदे गुट की शिवसेना ने 53 सीटें हासिल कीं। मनसे ने 5 सीटें प्राप्त कीं, जबकि उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना केवल 11 सीटों पर सिमट गई। किसी भी गठबंधन को सत्ता में आने के लिए 62 सीटों की आवश्यकता है, जिससे अकेले किसी दल के लिए बहुमत प्राप्त करना संभव नहीं हो सका।


महायुति में टकराव

महायुति में दरार: मेयर पद पर टकराव
हालांकि शिवसेना और बीजेपी महायुति का हिस्सा हैं, लेकिन कल्याण-डोंबिवली में मेयर पद को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए हैं। बीजेपी 2.5 साल के रोटेशन में मेयर पद साझा करने की मांग कर रही है, जबकि शिंदे गुट की शिवसेना पूरे कार्यकाल के लिए मेयर पद अपने पास रखना चाहती है।


मनसे के साथ गठबंधन का प्रभाव

मनसे के साथ गठबंधन से बढ़ा दबाव
कोंकण भवन में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने मनसे के साथ गठबंधन की पुष्टि की। इस गठबंधन के बाद कुल सीटें 58 तक पहुंच गईं, जो बहुमत से केवल चार सीटें कम हैं। श्रीकांत ने यह भी संकेत दिया कि उद्धव गुट के चार पार्षद भी इस गठबंधन में शामिल हो सकते हैं, जिससे बहुमत प्राप्त करने की संभावना बढ़ जाती है।


अन्य नगर निकायों में भी गठबंधन की राजनीति

महाराष्ट्र के अन्य नगर निकायों में भी गठबंधन की राजनीति
यह राजनीतिक परिदृश्य केवल कल्याण-डोंबिवली तक सीमित नहीं है। दिसंबर 2025 में अंबरनाथ और अकोला नगर परिषद चुनावों में भी इसी तरह की गठबंधन की राजनीति देखने को मिली थी। अंबरनाथ में बीजेपी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया, जबकि अकोला में AIMIM के साथ हाथ मिलाया। बाद में बीजेपी ने इन गठबंधनों पर सख्ती दिखाई, और कांग्रेस ने अंबरनाथ में अपने 12 पार्षदों को निलंबित कर दिया।


BMC में मेयर पद पर अनिश्चितता

BMC में भी मेयर पद को लेकर सस्पेंस
इन घटनाओं के बीच, मुंबई की बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) में भी मेयर पद को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। 227 सदस्यीय BMC में महायुति ने 118 वार्ड जीतकर बहुमत प्राप्त किया, लेकिन मेयर पद पर सहमति नहीं बन पा रही है। स्थिति तब और नाटकीय हो गई जब शिंदे ने कथित खरीद-फरोख्त की आशंका के चलते नव निर्वाचित 29 शिवसेना पार्षदों को एक फाइव-स्टार होटल में ठहराया और उन्हें जीत के प्रमाणपत्र मिलने तक वहीं रहने को कहा।


महायुति के अंदरूनी मतभेद

महायुति के अंदरूनी मतभेदों का खुलासा
यह हाई-प्रोफाइल नगर निगम चुनाव महायुति के भीतर चल रहे अंदरूनी संघर्ष और मतभेदों को स्पष्ट रूप से उजागर करता है। पार्टी के भीतर सत्ता और प्रभाव को लेकर टकराव गहराता जा रहा है, और यह स्थिति महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों की ओर संकेत करती है।