किसानों का महापंचायत: न्यू नोएडा परियोजना पर उठी आवाज़ें
ग्रेटर नोएडा में किसानों का विरोध
ग्रेटर नोएडा: न्यू नोएडा के विकास की सरकारी योजनाओं के बीच किसानों का विरोध एक नई दिशा में बढ़ता जा रहा है। गौतमबुद्धनगर और बुलंदशहर के 50 गांवों के किसानों ने एकजुट होकर महापंचायत का आयोजन किया, जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि उनकी मांगों को नजरअंदाज करने पर विकास की प्रक्रिया को बाधित किया जाएगा। इस महापंचायत में किसानों ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए निर्णायक संघर्ष का संकल्प लिया।
महापंचायत में किसानों की मांगें
इस महापंचायत में गौतमबुद्धनगर के 13 और बुलंदशहर के 37 गांवों के किसान शामिल हुए। उन्होंने एकजुट होकर 20 हजार रुपये प्रति गज की दर से प्लॉट आवंटन, गांवों की जनसंख्या से संबंधित समस्याओं का समाधान, और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार की सुनिश्चितता की मांग की।
भविष्य की सुरक्षा की मांग
जमीन देने वालों के भविष्य की गारंटी की मांग
किसानों का कहना है कि शहर बसाने की योजनाएं तो बनाई जा रही हैं, लेकिन उन परिवारों के भविष्य और अधिकारों की सुरक्षा कौन करेगा? उनका आरोप है कि विकास की योजनाओं में किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। केवल भूमि अधिग्रहण से विकास का सपना पूरा नहीं हो सकता।
किसानों का दृढ़ संकल्प
जब तक मांगें नहीं मानीं, जमीन नहीं देंगे
महापंचायत में किसानों ने स्पष्ट रूप से कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक वे अपनी जमीन नहीं देंगे। उन्होंने न्यू नोएडा परियोजना के खिलाफ विरोध जारी रखने की चेतावनी भी दी। किसानों की एकजुटता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि न्यू नोएडा का विकास आसान नहीं होगा। अब सभी की नजरें शासन-प्रशासन की प्रतिक्रिया और किसानों के साथ होने वाली अगली वार्ता पर टिकी हैं।