केरल में कांग्रेस की नई सरकार: मुख्यमंत्री के नाम पर सस्पेंस बरकरार
मुख्यमंत्री के चेहरे पर अनिश्चितता
नई दिल्ली: केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) ने शानदार जीत हासिल की है, लेकिन मुख्यमंत्री के नाम को लेकर स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है। राज्य में सरकार गठन के लिए राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं, और पार्टी के भीतर लगातार बैठकें हो रही हैं। इस बीच, कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिल्ली पहुंच रहे हैं, जहां पार्टी हाईकमान नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम निर्णय लेने की तैयारी कर रहा है।
दिल्ली में महत्वपूर्ण बैठक
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष के. मुरलीधरन और वीएम सुधीरन ने पुष्टि की है कि उन्हें पार्टी हाईकमान द्वारा दिल्ली बुलाया गया है। दोनों नेता राष्ट्रीय राजधानी में होने वाली बैठक में शामिल होंगे, जहां केरल के नए नेतृत्व पर चर्चा की जाएगी।
वीएम सुधीरन ने कहा कि उन्हें फोन आने के बाद आश्चर्य हुआ। उन्होंने बताया कि उन्हें राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर अपनी राय देने के लिए बुलाया गया है। सुधीरन ने कहा कि वह पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी स्पष्ट राय रखेंगे, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम निर्णय कब होगा। हालांकि, पार्टी के भीतर चल रही गतिविधियों से संकेत मिल रहे हैं कि निर्णय जल्द लिया जा सकता है।
48 घंटे में संभावित निर्णय
कांग्रेस नेता के. मुरलीधरन ने संकेत दिया है कि मुख्यमंत्री पद को लेकर अगले 48 घंटों में स्थिति स्पष्ट हो सकती है। उनका कहना है कि पार्टी हाईकमान जल्द ही अंतिम निर्णय लेकर नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा कर सकता है। मुरलीधरन ने पहले ही पार्टी पर्यवेक्षकों के सामने अपनी राय रख दी थी और अब भी वह उसी पर कायम हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय कांग्रेस नेतृत्व का होगा और सभी नेताओं को इसे स्वीकार करना होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस इस बार मुख्यमंत्री के चयन में जल्दबाजी नहीं करना चाहती, क्योंकि पार्टी लंबे समय बाद इतनी बड़ी जीत हासिल कर सत्ता में लौटी है।
मुख्यमंत्री पद के लिए प्रमुख दावेदार
केरल विधानसभा की 140 सीटों में से 102 सीटें जीतकर UDF ने शानदार जीत दर्ज की है। इसके बाद से मुख्यमंत्री पद के लिए कई बड़े नेताओं के नाम चर्चा में हैं, जिनमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद केसी वेणुगोपाल का नाम सबसे प्रमुख है।
इसके अलावा, विपक्ष के नेता वीडी सतीशान और वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला भी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल हैं। पार्टी के भीतर विभिन्न गुट अपने-अपने नेताओं के समर्थन में सक्रिय हैं, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है ताकि किसी विवाद का सामना न करना पड़े।
बीजेपी का कांग्रेस पर हमला
मुख्यमंत्री के नाम पर हो रही देरी को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कांग्रेस इस समय राज्य के विकास से ज्यादा अपनी अंदरूनी राजनीति में उलझी हुई है। बीजेपी नेता वी मुरलीधरन ने भी कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि इतनी बड़ी जीत मिलने के बाद भी पार्टी किसी एक नाम पर सहमति नहीं बना पा रही है।
उनके अनुसार, इससे स्पष्ट होता है कि कांग्रेस नेताओं का ध्यान जनता की बजाय सत्ता की राजनीति पर अधिक है। उन्होंने कहा कि जनता ने कांग्रेस को स्पष्ट जनादेश दिया है, लेकिन सरकार गठन में देरी होना लोगों के विश्वास का अपमान माना जा रहा है।
कांग्रेस के सामने चुनौतियाँ
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती सभी गुटों को एक साथ लेकर चलने की है। मुख्यमंत्री के चयन में किसी भी प्रकार की नाराजगी भविष्य में पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है। इसी कारण हाईकमान बेहद सावधानी से निर्णय लेने की कोशिश कर रहा है। अब सबकी नजर दिल्ली में होने वाली बैठकों पर टिकी हुई है, जहां केरल के अगले मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लग सकती है।