केरल हाई कोर्ट से मोनालिसा और फरमान को मिली राहत: जानें पूरी कहानी
कोच्चि में मिली राहत
कोच्चि: कुंभ मेले के दौरान चर्चा में आई मोनालिसा भोसले और उनके पति मोहम्मद फरमान को केरल हाई कोर्ट से महत्वपूर्ण राहत मिली है। अदालत ने एक आपराधिक मामले में फरमान को ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी है, जिससे उन्हें गिरफ्तारी से एक महीने की सुरक्षा मिली है। इस अवधि में, वह मध्य प्रदेश की अदालत में नियमित अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकेंगे।
अदालत का आदेश
केरल हाई कोर्ट का यह निर्णय उस याचिका पर आधारित है, जिसमें इस अंतर-धार्मिक दंपति ने गिरफ्तारी से सुरक्षा की मांग की थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा और बाद में फरमान को अस्थायी राहत प्रदान की।
गिरफ्तारी से सुरक्षा
जस्टिस कौसर एडापगाथ की पीठ ने आदेश दिया कि फरमान को एक महीने तक गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। यह राहत इसलिए दी गई ताकि वह मध्य प्रदेश में अपनी कानूनी प्रक्रिया पूरी कर सकें और अग्रिम जमानत की मांग कर सकें।
गंभीर आरोपों का सामना
मध्य प्रदेश पुलिस ने मोनालिसा के पिता की शिकायत के आधार पर फरमान के खिलाफ मामला दर्ज किया है। उन पर अपहरण और जालसाजी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा, उन पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, बाल विवाह निषेध अधिनियम, और पोक्सो अधिनियम के तहत भी केस दर्ज किया गया है।
दंपति का बचाव
दंपति के वकील एम ससिंद्रन ने अदालत में कहा कि उनके मुवक्किलों पर लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं। उन्होंने बताया कि शूटिंग के दौरान दोनों के बीच प्रेम संबंध विकसित हुए और उन्होंने विवाह करने का निर्णय लिया।
वकील ने यह भी कहा कि मोनालिसा के पिता ने पहले इस रिश्ते को स्वीकार किया था, लेकिन बाद में अपना रुख बदल लिया।
बालिग होने के सबूत
मोनालिसा ने अदालत में एक हलफनामा पेश किया, जिसमें उन्होंने शादी से जुड़ी परिस्थितियों का उल्लेख किया और दावा किया कि शादी के समय वह बालिग थीं। उनके समर्थन में आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और बैंक खाते से संबंधित दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए।
जान का खतरा
दंपति ने अदालत को बताया कि यदि वे मध्य प्रदेश लौटते हैं, तो उन्हें जान से मारने की धमकियों और ऑनर किलिंग का खतरा हो सकता है। उनका आरोप है कि उन्हें नाबालिग साबित करने के लिए उनके जन्म प्रमाण पत्र को रद्द कर दिया गया।
मोनालिसा ने इस मामले में पहले ही मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में याचिका दायर कर रखी है।
सरकार का विरोध
मध्य प्रदेश सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इस मामले की सुनवाई के लिए केरल हाई कोर्ट उपयुक्त नहीं है, क्योंकि मामला मध्य प्रदेश में दर्ज किया गया है।
अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा
हालांकि अदालत के ताजा आदेश से फरमान को राहत मिली है, लेकिन विवाह, उम्र विवाद और मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा लगाए गए आरोपों से जुड़े मामले अब भी विचाराधीन हैं। इन सभी मुद्दों पर अंतिम निर्णय संबंधित अदालतों में ही होगा।