कोटा अस्पताल में प्रसूताओं की मौत: क्या है सच्चाई? जानें पूरी कहानी
कोटा में अस्पताल में गंभीर स्थिति
कोटा: राजस्थान के कोटा में न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (NMCH) में सिजेरियन डिलीवरी के बाद दो महिलाओं की मौत हो गई है, जिससे चिकित्सा और प्रशासनिक संकट उत्पन्न हो गया है। चार अन्य प्रसूताओं का इलाज ICU और नेफ्रोलॉजी वार्ड में चल रहा है। इस घटना ने अस्पताल प्रशासन, जिला प्रशासन और राज्य सरकार के प्रति कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
परिजनों ने अस्पताल पर गलत दवा देने और मेडिकल रिकॉर्ड को गायब करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस बीच, सरकार ने मामले की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है और जयपुर से विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम कोटा भेजी गई है। लापरवाही के आरोपों के चलते डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
सरकार की सख्त कार्रवाई
डॉक्टर और नर्स सस्पेंड
राज्य सरकार ने 9 मई 2026 को मामले में सख्त कदम उठाते हुए डॉक्टर नवनीत कुमार और दो नर्सों, गुरजोत कौर और निमेश वर्मा को सस्पेंड कर दिया। इसके अलावा, कॉन्ट्रैक्ट पर कार्यरत डॉक्टर श्रद्धा उपाध्याय की सेवाएं भी समाप्त कर दी गईं। यूनिट हेड डॉ. बीएल पटीदार और डॉ. नेहा सीहरा को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है कि उनकी निगरानी में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
राजनीतिक हलचल
लोकसभा अध्यक्ष का दौरा
इस घटना ने राजनीतिक हलचल भी पैदा कर दी है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पहले अस्पताल का दौरा किया और फिर मृतका ज्योति के घर जाकर परिवार से मिले।
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, "मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दो प्रसूताओं की मृत्यु अत्यंत दुखद है। मैंने पीड़ित परिवार से मिलकर गहरी संवेदना व्यक्त की है और आश्वासन दिया है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जाएगी।"
कांग्रेस की जांच समिति
जांच समिति का गठन
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भी इस मामले में चार सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन किया है। इस समिति में पूर्व मंत्री परसादी लाल मीणा, विधायक डूंगरराम गेदर, महासचिव पुष्पेन्द्र भारद्वाज और डॉ. विकास महला शामिल हैं। समिति को तीन दिन में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
चिंताजनक मेडिकल रिपोर्ट
मेडिकल रिपोर्ट में गंभीर संकेत
गंभीर हालत में भर्ती प्रसूता रागिनी की मेडिकल रिपोर्ट में कई चिंताजनक तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों किडनियों में 'Increased Echogenicity' पाया गया है, जो गंभीर संक्रमण या किडनी डैमेज की ओर इशारा करता है। इसके अलावा, पेट में खून जमा होने और लिवर के बढ़ने जैसे लक्षण भी मिले हैं।
रिपोर्ट के आधार पर आशंका जताई जा रही है कि किसी जहरीले तत्व या गलत दवा का असर शरीर के मुख्य अंगों पर पड़ा है।
परिजनों के आरोप
फाइलें गायब करने के आरोप
मृतका ज्योति के पति रवि और अन्य परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि ऑपरेशन के बाद एक इंजेक्शन लगाए जाने के बाद मरीजों की हालत बिगड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन पुरानी फाइलें हटाकर नई पर्चियां बनवा रहा है।
परिजनों ने मांग की है कि पुरानी मेडिकल फाइलें सामने लाई जाएं ताकि यह पता चल सके कि कौन सी दवा दी गई थी।
अधिकारियों के बयान में विरोधाभास
जिला कलेक्टर का बयान
जिला कलेक्टर पीयूष सामरिया ने कहा कि भर्ती के समय महिलाओं की स्थिति सामान्य थी और बाद में अचानक तबीयत बिगड़ने के कारणों की जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि दवाओं के सैंपल FSL जांच के लिए भेजे गए हैं।
वहीं मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. नीलेश कुमार जैन ने शुरुआती जांच में स्टाफ को क्लीन चिट देते हुए कहा कि अब तक किसी मानवीय लापरवाही के प्रमाण नहीं मिले हैं।
विशेषज्ञों की टीम का दौरा
जयपुर से आई विशेषज्ञों की टीम
राज्य सरकार के निर्देश पर जयपुर के SMS अस्पताल और एम्स से विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम कोटा पहुंच चुकी है। संभागीय आयुक्त अनिल कुमार ने अस्पताल का दौरा कर मरीजों की स्थिति का जायजा लिया। प्रशासन ने फिलहाल मरीजों को जयपुर रेफर नहीं करने का निर्णय लिया है।
अस्पताल में तनाव का माहौल
डर और सन्नाटा
घटना के बाद अस्पताल में डर और तनाव का माहौल बना हुआ है। ICU और डायलिसिस यूनिट में भर्ती महिलाओं का इलाज विशेषज्ञों की निगरानी में जारी है। वहीं उन नवजात बच्चों को अलग वार्ड में शिफ्ट किया गया है, जिनकी मांएं या तो इस दुनिया में नहीं रहीं या जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही हैं।