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कोलकाता में मेयर पद के लिए ममता बनर्जी की अहम बैठक: कौन होगा अगला नेता?

कोलकाता नगर निगम के मेयर पद से फिरहाद हकीम के इस्तीफे के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। ममता बनर्जी ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है, जिसमें नए मेयर के नाम पर निर्णय लिया जा सकता है। पूर्व मेयर शोभन चटर्जी का नाम सबसे अधिक चर्चा में है, जबकि नगर निगम बोर्ड की स्थिति भी असमंजस में है। जानें इस बैठक के संभावित परिणाम और कोलकाता की राजनीति पर इसके प्रभाव के बारे में।
 

कोलकाता में राजनीतिक हलचल


कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता फिरहाद हकीम के कोलकाता नगर निगम (KMC) के मेयर पद से इस्तीफे के बाद शहर की राजनीतिक स्थिति में उथल-पुथल मच गई है। अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि अगला मेयर कौन होगा और क्या मौजूदा नगर निगम बोर्ड अपना कार्यकाल पूरा कर पाएगा।


ममता बनर्जी की महत्वपूर्ण बैठक

इस विषय पर चर्चा के लिए तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को दोपहर तीन बजे एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। यह बैठक ईएम बाइपास स्थित तृणमूल भवन में आयोजित की जाएगी, जिसमें पार्टी के पार्षदों और वरिष्ठ नेताओं को शामिल होने का निर्देश दिया गया है। राजनीतिक हलकों में इस बैठक को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें नए मेयर के नाम पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।


शोभन चटर्जी का नाम चर्चा में

पार्टी के भीतर पूर्व मेयर शोभन चटर्जी का नाम सबसे अधिक चर्चा में है। सूत्रों के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस उनके नाम पर गंभीरता से विचार कर रही है। हालांकि, शोभन चटर्जी वर्तमान में पार्षद नहीं हैं, लेकिन नए नियमों के अनुसार, कोई भी नागरिक मेयर बन सकता है, बशर्ते वह छह महीने के भीतर पार्षद का चुनाव जीत ले।


एक बड़ी चुनौती यह भी है कि मौजूदा नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल दिसंबर में समाप्त होने वाला है। इस स्थिति में उनकी संभावित वापसी को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।


नगर निगम बोर्ड की स्थिति

फिरहाद हकीम के इस्तीफे के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है। राज्य सरकार ने निगम को पत्र भेजकर पूछा है कि मौजूदा बोर्ड को भंग करने का विचार क्यों नहीं किया जा सकता। निगम प्रशासन से तीन दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है।


अन्य संभावित नामों पर विचार

कुछ तृणमूल कांग्रेस के नेता मानते हैं कि डिप्टी मेयर अतिन घोष या मेयर परिषद के किसी अनुभवी सदस्य को यह जिम्मेदारी सौंपी जानी चाहिए। इस मुद्दे पर पार्टी के भीतर विचार-विमर्श जारी है। दिल्ली में होने वाली विपक्षी इंडिया गठबंधन की बैठक से पहले ममता बनर्जी का यह निर्णय कोलकाता की राजनीति पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।