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क्या अकाली दल की 'पंजाब बचाओ' मुहिम है सिर्फ एक राजनीतिक ड्रामा?

आम आदमी पार्टी के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने अकाली दल की 'पंजाब बचाओ' मुहिम को गुमराह करने वाला बताया। उन्होंने अकाली दल के पिछले कार्यों, तीन कृषि कानूनों के समर्थन और 2015 की बेअदबी घटनाओं पर सवाल उठाए। पन्नू ने कहा कि पंजाब के लोग अकाली दल के रिकॉर्ड को नहीं भूल सकते और उन्हें स्पष्टता की आवश्यकता है। जानें इस राजनीतिक ड्रामे के पीछे की सच्चाई और पंजाबियों की यादें।
 

चंडीगढ़ में आम आदमी पार्टी का बयान


चंडीगढ़: आम आदमी पार्टी (आप) के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने मंगलवार को कहा कि अकाली दल (बादल) की नई 'पंजाब बचाओ' मुहिम केवल पंजाबियों को गुमराह करने का एक प्रयास है। उन्होंने यह भी कहा कि लोग पार्टी के पिछले कार्यकाल, तीन कृषि कानूनों के समर्थन और पंजाब तथा सिख समुदाय से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर इसके बार-बार यू-टर्न को नहीं भूल सकते। पन्नू ने कहा कि अकाली नेतृत्व अपने अतीत को मिटाने के लिए राजनीतिक नारों का सहारा नहीं ले सकता।


अकाली-भाजपा शासन का रिकॉर्ड

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, पन्नू ने कहा, "2007 से 2017 तक, जब अकाली-भाजपा सरकार पंजाब में थी, तब राज्य में चिट्टे का बढ़ता प्रचलन, गैंगस्टरों का उदय और माफिया का प्रभाव देखा गया। वही नेता जो अब पंजाब को बचाने का दावा कर रहे हैं, उस समय राज्य के मुखिया थे। पंजाबियों को उनके रिकॉर्ड के बारे में सवाल पूछने का पूरा अधिकार है।"


तीन कृषि कानूनों पर अकाली दल का यू-टर्न

पन्नू ने तीन कृषि कानूनों का जिक्र करते हुए कहा कि जब ये कानून लागू हुए थे, तब बादल परिवार ने इनका समर्थन किया था। उन्होंने कहा, "सुखबीर बादल ने खुद कहा था कि मौजूदा मंडी सिस्टम को खत्म किया जाना चाहिए। इन कानूनों ने मंडी के ढांचे को खतरे में डाल दिया था, जिसके माध्यम से पंजाब के किसान अपनी उपज बेचते हैं।"


2015 बेअदबी कांड पर जवाबदेही

पन्नू ने 2015 में हुई बेअदबी की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि अकाली नेतृत्व ने उस समय अपना स्टैंड बदल लिया था। उन्होंने कहा, "सुखबीर बादल ने बेअदबी की घटनाओं की जिम्मेदारी ली थी, लेकिन बाद में कहा कि ये बयान दबाव में दिए गए थे।"


सोशल मीडिया पर अकाली नेताओं की चुप्पी

पन्नू ने हरसिमरत कौर बादल के सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि अकाली नेतृत्व को स्पष्टता देनी चाहिए। उन्होंने कहा, "लोग उन नेताओं से स्थिरता और स्पष्टता के हकदार हैं जो सिख भावनाओं का उल्लेख करते हैं।"


बंदी सिंहों के मुद्दे पर अकाली दल का रुख

पन्नू ने कहा कि अकाली नेताओं की चिट्ठियों और उनके स्टैंड में अंतर उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है। उन्होंने कहा, "पंजाबियों को यह जानने का हक है कि इतने महत्वपूर्ण मुद्दों पर पार्टी का स्टैंड क्यों बदलता है।"


पंजाबियों की यादें और अकाली दल का रिकॉर्ड

पन्नू ने कहा कि अकाली दल एक बार फिर 'पंजाब बचाओ' मुहिम के जरिए पंजाबियों को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन लोग उनके पिछले कार्यों को नहीं भूल सकते। उन्होंने कहा, "पंजाब के लोग तीन कृषि कानूनों, 2015 की बेअदबी की घटनाओं और बहबल कलां गोलीकांड पर बादलों के स्टैंड को नहीं भूले हैं।"