क्या केरल में लेफ्टपंथ का अंत? एग्जिट पोल में UDF की वापसी की संभावना
केरल में चुनावी परिदृश्य
दक्षिण भारत का केरल एक ऐसा राज्य है, जहां पिछले एक दशक से लेफ्टपंथी सरकार का शासन रहा है। हालिया एग्जिट पोल के अनुसार, लेफ्टपंथ को संभावित हार का सामना करना पड़ सकता है, जबकि यूडीएफ (UDF) सत्ता में लौटने के लिए तैयार नजर आ रही है।
यदि एग्जिट पोल के ये अनुमान वास्तविक परिणामों में बदलते हैं, तो क्या भारत 'लेफ्ट-मुक्त' हो जाएगा? केरल विधानसभा चुनावों के एग्जिट पोल के परिणाम सामने आ रहे हैं। केरल, जो भारत में लेफ्टपंथ का एकमात्र गढ़ था, अब एक दशक बाद ढहता हुआ प्रतीत हो रहा है।
एग्जिट पोल के अनुसार, पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली एलडीएफ (LDF) को बड़ा झटका लग सकता है, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ (UDF) दस साल बाद सत्ता में वापसी के लिए तैयार है।
राज्य की 140 विधानसभा सीटों के लिए मतदान 9 अप्रैल को एक चरण में हुआ था, और सरकार बनाने के लिए 71 सीटों की आवश्यकता होती है। एग्जिट पोल सर्वेक्षणों के अनुसार, अनुमान है कि लेफ्टपंथ सत्ता से बाहर हो जाएगा और कांग्रेस की वापसी होगी।
यूडीएफ, जिसने पिछले एक दशक का 'वनवास' झेला है, अब पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने के लिए तैयार दिख रहा है। Axis My India के अनुसार, यूडीएफ को 78 से 90 विधानसभा सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि एलडीएफ को केवल 55 सीटें जीतने की संभावना है।
यूडीएफ को 44 प्रतिशत वोट शेयर मिलने का अनुमान है, जबकि एलडीएफ का आंकड़ा 39 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। इस बार, बीजेपी सहित अन्य पार्टियों को मिलाकर कुल 14 प्रतिशत वोट शेयर मिलने की संभावना है।
अनुमानित सीटों की संख्या:
यूडीएफ: 78 से 90 सीटें
एलडीएफ: 49 से 55 सीटें
बीजेपी: 0 से 3 सीटें
वोट शेयर का अनुमान:
यूडीएफ: 44 प्रतिशत
एलडीएफ: 39 प्रतिशत
बीजेपी और अन्य: 14 प्रतिशत
क्या होगा लेफ्ट-मुक्त भारत?
यदि 4 मई को आने वाले वास्तविक नतीजों से एग्जिट पोल के अनुमान सही साबित होते हैं, तो केरल में लेफ्टपंथियों का सत्ता से बाहर होना केवल एक हार नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक झटका होगा। 73 वर्षों में पहली बार भारत के किसी भी राज्य में लेफ्ट मोर्चा की सरकार नहीं होगी।
विडंबना यह है कि देश को 'लेफ्ट-मुक्त' बनाने का कार्य कांग्रेस ने किया है, जो वर्षों तक लेफ्टपंथियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चली थी। आजादी के बाद, लेफ्टपंथियों ने सबसे पहले 1957 में केरल में सरकार बनाई थी, इसके बाद 1977 में बंगाल में और फिर त्रिपुरा में लेफ्टपंथी सरकारें बनीं। 2011 में बंगाल में लेफ्टपंथियों को सत्ता से बाहर कर दिया गया, और उसके बाद 2018 में त्रिपुरा में भी वे सत्ता से बाहर हो गए।