क्या ममता बनर्जी अपनी पार्टी में बढ़ती नाराजगी को संभाल पाएंगी?
पश्चिम बंगाल में टीएमसी की अंदरूनी कलह
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की प्रमुख ममता बनर्जी इन दिनों अपनी पार्टी के भीतर बढ़ती असंतोष की स्थिति को लेकर चिंतित हैं। हाल ही में, उन्होंने कोलकाता में अपने कालीघाट आवास पर एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई, जिसमें अपेक्षा के विपरीत केवल कुछ ही नेता शामिल हुए। इस बैठक में सिर्फ आठ विधायक और छह सांसद उपस्थित थे, जिससे पार्टी के अंदरूनी विवादों की चर्चा तेज हो गई है।
टीएमसी का स्पष्टीकरण
बैठक में शामिल विधायकों में बीना मंडल, आशिमा पात्रा, मदन मित्रा, कुणाल घोष, फिरहाद हकीम, शोभनदेब चट्टोपाध्याय, बिमान बनर्जी और अशोक कुमार देब शामिल थे। सांसदों में डोला सेन, माला रॉय, कल्याण बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओ'ब्रायन और सुदीप बंद्योपाध्याय शामिल थे। टीएमसी ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि यह सभी सांसदों और विधायकों की बैठक नहीं थी, बल्कि यह राष्ट्रीय कार्य समिति की बैठक थी, जिसमें कई सदस्य ऑनलाइन जुड़े थे। फिर भी, पार्टी के भीतर कलह की खबरें लगातार आ रही हैं।
नेतृत्व से असंतोष
कुछ विधायकों और सांसदों का कहना है कि वे नेतृत्व की कार्यशैली से संतुष्ट नहीं हैं। विधानसभा में एक असंतुष्ट गुट भी सक्रिय है, जिसका नेतृत्व पार्टी से निष्कासित ऋतब्रता बनर्जी कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें कई विधायकों का समर्थन प्राप्त है, जिससे पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं।
इस असंतोष के चलते संसद में भी टीएमसी के कुछ नेताओं की नाराजगी चर्चा का विषय बनी हुई है। राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि कुछ सांसद भविष्य में अलग राजनीतिक रास्ता चुन सकते हैं, हालांकि इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
क्या ममता बनर्जी स्थिति को संभाल पाएंगी?
इस बीच, ममता बनर्जी लोकसभा की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने पर विचार कर सकती हैं। खबरों के अनुसार, पार्टी बहरामपुर लोकसभा सीट को लेकर रणनीति बना रही है, लेकिन इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। फिलहाल, टीएमसी के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी को एकजुट बनाए रखना है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ममता बनर्जी इस स्थिति से कैसे निपटती हैं, इस पर राजनीतिक जानकारों और विपक्ष की नजर बनी हुई है।