गांजे की तस्करी का बड़ा खुलासा: अनानास के नीचे छिपा था नशे का कारोबार
नई दिल्ली में नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई
नई दिल्ली: फलों की एक साधारण खेप के पीछे छिपा था नशे का बड़ा कारोबार, लेकिन तस्करों की यह चाल नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की नजर से बच नहीं सकी। एनसीबी की अहमदाबाद जोनल यूनिट ने खुफिया सूचना के आधार पर 523.450 किलोग्राम गांजा बरामद किया। इस मामले में अदालत ने दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 10-10 वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही उन पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
यह मामला 9 जून 2022 का है। एनसीबी को गांजे की एक बड़ी खेप को अंतरराज्यीय स्तर पर गुजरात पहुंचाने की विश्वसनीय सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही, टीम ने गुजरात के सूरत जिले के मंगरोल स्थित लिंडियाड गांव में निगरानी शुरू की। एनसीबी की टीम संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रख रही थी। इसी दौरान एक टाटा ट्रक से सामान निकालकर महिंद्रा बोलेरो पिकअप में स्थानांतरित किया जा रहा था। एनसीबी की टीम ने मौके पर पहुंचकर दोनों आरोपियों को पकड़ लिया और वाहनों की तलाशी शुरू की। तलाशी के दौरान 17 प्लास्टिक बोरियों में कुल 101 पैकेटों में 523.450 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ।
तस्करों की चालाकी: अनानास के नीचे छिपा नशा
अनानास के नीचे छिपा था करोड़ों का नशे का खेल
तस्करों ने एनसीबी और कानून-व्यवस्था से बचने के लिए गांजे को बेहद चालाकी से छिपाया था। गांजे की बोरियों को अनानास की खेप के नीचे रखा गया था, ताकि पहली नजर में यह सामान्य फल ढोने वाला ट्रक लगे। लेकिन एनसीबी की सतर्कता ने तस्करों की योजना को नाकाम कर दिया। जांच में पता चला कि यह कोई साधारण तस्करी नहीं, बल्कि ओडिशा से गुजरात तक गांजे की अंतरराज्यीय आपूर्ति और अवैध बिक्री की एक संगठित साजिश थी। आरोपियों की भूमिका इस नेटवर्क में महत्वपूर्ण पाई गई।
अदालत का फैसला: तस्करों पर कसा गया शिकंजा
चार साल बाद अदालत का फैसला, तस्करों पर कसा कानून का शिकंजा
मामले की विस्तृत जांच के बाद एनसीबी ने एनडीपीएस अधिनियम, 1985 की विभिन्न धाराओं के तहत अभियोजन शिकायत सूरत की माननीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत में दाखिल की। इसके बाद विधिक प्रक्रिया और सुनवाई चली। अदालत ने 3 अक्टूबर 2026 को अपना फैसला सुनाते हुए दोनों आरोपियों, मालेगांव, महाराष्ट्र निवासी शेख अकील शेख और सूरत, गुजरात निवासी अयाज शेख को दोषी ठहराया। अदालत ने दोनों को 10-10 वर्ष की कठोर कारावास की सजा के साथ एक-एक लाख रुपये के जुर्माने से दंडित किया।
एनसीबी का संदेश: नशे के खिलाफ अभियान जारी रहेगा
एनसीबी का साफ संदेश नशे के नेटवर्क पर आखिरी वार तक जारी रहेगा अभियान
इस मामले में मिली सजा को एनसीबी की एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। खुफिया सूचना से लेकर निगरानी, कार्रवाई, बरामदगी, जांच और अदालत में प्रभावी पैरवी तक एनसीबी अहमदाबाद जोनल यूनिट की पूरी कार्रवाई ने तस्करों को कानून के कटघरे में लाने में मदद की। एनसीबी ने स्पष्ट किया है कि देशभर में सक्रिय अंतरराज्यीय मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क को समाप्त करने के लिए अभियान लगातार जारी रहेगा। एनसीबी ने लोगों से अपील की है कि नशीले पदार्थों की बिक्री, परिवहन या कारोबार से जुड़ी किसी भी जानकारी को मानस राष्ट्रीय नारकोटिक्स हेल्पलाइन के टोल-फ्री नंबर 1933 पर साझा करें। सूचना देने वालों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।