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ग्रेटर नोएडा में हाईराइज सोसाइटियों की सुरक्षा पर उठे सवाल, स्ट्रक्चरल ऑडिट की मांग

ग्रेटर नोएडा में एक युवक की दर्दनाक मौत ने शहर की हाईराइज सोसाइटियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। निवासियों ने निर्माण गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई है और सभी सोसाइटियों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने की मांग की है। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित ऑडिट आवश्यक है, लेकिन नोएडा-ग्रेटर नोएडा में ऐसा कोई तंत्र नहीं है। इस स्थिति ने लाखों निवासियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
 

दर्दनाक घटना ने बढ़ाई चिंता

ग्रेटर नोएडा: एक युवक की शनिवार रात को एक सोसाइटी में प्लास्टर गिरने से हुई मौत ने शहर की उच्च इमारतों की निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना ने लाखों फ्लैट मालिकों और निवासियों में भय का माहौल पैदा कर दिया है। निवासियों के संगठनों ने सभी पुरानी और नई सोसाइटियों का तुरंत स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने की मांग की है।


निर्माण गुणवत्ता पर सवाल

ग्रेटर नोएडा और नोएडा क्षेत्र में 200 से अधिक बिल्डर सोसाइटियां हैं, जिनमें लाखों लोग रहते हैं। इसके बावजूद, अब तक किसी भी सोसाइटी का व्यापक स्ट्रक्चरल ऑडिट नहीं हुआ है। प्राधिकरण को हर महीने प्लास्टर गिरने, दीवारों में दरारें आने और अन्य निर्माण संबंधी समस्याओं की 20 से 25 शिकायतें मिल रही हैं।


निवासियों की चिंताएं

निवासियों का आरोप है कि कई सोसाइटियों में निर्माण के दौरान निम्न गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग किया गया है। पंचशील ग्रीन्स, अजनारा होम्स, गौर सिटी-1 और 2, विक्ट्री वन, इरोस संपूर्णम, और अन्य सोसाइटियों में समय-समय पर प्लास्टर गिरने और दीवारों में दरारें आने की शिकायतें आती रही हैं।


इरोस सम्पूर्णम सोसाइटी की स्थिति

इरोस सम्पूर्णम सोसाइटी के निवासियों के अनुसार, टावरों की बाहरी दीवारों और कॉमन एरिया से अक्सर प्लास्टर गिरता रहता है। इस सोसायटी के नए फेस का हाल भी खराब हो रहा है, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। पार्किंग और बेसमेंट में सीपेज और कंक्रीट उखड़ने की समस्याएं भी बनी हुई हैं।


विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी इमारत की उम्र बढ़ने के साथ नियमित स्ट्रक्चरल ऑडिट आवश्यक है। इससे कमजोर हिस्सों की पहचान कर समय पर मरम्मत की जा सकती है। मुंबई और पुणे जैसे महानगरों में यह प्रक्रिया अनिवार्य है, जबकि नोएडा-ग्रेटर नोएडा में ऐसा कोई तंत्र विकसित नहीं हुआ है।


निवासी कल्याण संघों की मांग

निवासी कल्याण संघों ने मांग की है कि 10 वर्ष या उससे अधिक पुरानी सभी हाईराइज इमारतों का स्वतंत्र एजेंसियों से ऑडिट कराया जाए। साथ ही, दोषपूर्ण निर्माण पाए जाने पर बिल्डरों की जवाबदेही तय की जाए।


सुरक्षा पर सवाल

सोसाइटियों में हो रही घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या शहर की ऊंची इमारतें वास्तव में सुरक्षित हैं। जब तक व्यापक स्ट्रक्चरल ऑडिट और सख्त निगरानी व्यवस्था लागू नहीं होती, तब तक लाखों निवासियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहेगी।


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