छत्तीसगढ़ की गोधाम योजना: बेसहारा मवेशियों की समस्या का समाधान या प्रशासनिक बाधा?
गोधाम योजना की चुनौतियाँ
रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी गोधाम योजना वर्तमान में भूमि की कमी और धीमी प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रही है। बेसहारा मवेशियों की बढ़ती संख्या और सड़कों पर उनकी मौजूदगी से उत्पन्न समस्याओं को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने हर विकासखंड में 10 गोधाम स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। इस योजना के तहत कुल 1,460 गोधामों का निर्माण प्रस्तावित है।
गोधामों का शुभारंभ
29 गोधामों का उद्घाटन
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 14 मार्च को बिलासपुर से 29 गोधामों का औपचारिक उद्घाटन किया। हालांकि, योजना के विस्तार में भूमि आवंटन एक बड़ी बाधा बनकर उभरी है। रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़ जैसे कई जिलों में अभी तक पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं हो पाई है, जिसके कारण कई प्रस्तावित गोधाम शुरू नहीं हो सके हैं।
यातायात पर प्रभाव
यातायात व्यवस्था पर असर
जानकारी के अनुसार, सड़कों पर घूमते बेसहारा मवेशियों के कारण यातायात व्यवस्था लगातार प्रभावित हो रही है। कई सड़क दुर्घटनाओं के पीछे भी यही समस्या मुख्य कारण बन रही है। हाल ही में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से इस मुद्दे पर कड़े सवाल पूछे थे। अदालत ने कहा कि यदि व्यवस्था संतोषजनक है, तो फिर पशु सड़कों पर क्यों दिखाई दे रहे हैं।
गोधाम की क्षमता
200 गोवंश रखने की क्षमता
सरकार की योजना के अनुसार, प्रत्येक गोधाम में लगभग 200 गोवंश रखने की क्षमता होगी। इसके साथ ही, चारा विकास को बढ़ावा देने के लिए कम से कम एक एकड़ भूमि अनिवार्य रखी गई है। सरकार एक एकड़ भूमि पर चारा उत्पादन के लिए प्रति वर्ष 47 हजार रुपये की सहायता प्रदान करेगी, जबकि अधिकतम पांच एकड़ तक यह सहायता 2.35 लाख रुपये तक पहुंच सकती है।
कर्मचारियों के मानदेय
प्रतिमाह मिलेगी इतनी सैलरी
गोधामों के संचालन और मवेशियों की देखभाल के लिए कर्मचारियों के मानदेय की भी व्यवस्था की गई है। गोधाम में कार्यरत कर्मचारियों को 10,916 रुपये प्रतिमाह और पशुसेवकों को 13,126 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे। मवेशियों के भरण-पोषण के लिए प्रति पशु प्रतिदिन सहायता राशि निर्धारित की गई है। यह राशि पहले वर्ष 10 रुपये, दूसरे वर्ष 20 रुपये, तीसरे वर्ष 30 रुपये और चौथे वर्ष 35 रुपये प्रतिदिन होगी। सरकार का दावा है कि योजना के पूर्ण कार्यान्वयन के बाद बेसहारा मवेशियों की समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा।