छत्तीसगढ़ के बस्तर में धर्म परिवर्तन विवाद: 26 ईसाई परिवारों को गांव छोड़ने का अल्टीमेटम
धर्म परिवर्तन और सामाजिक बहिष्कार का मुद्दा
रायपुर: छत्तीसगढ़ का बस्तर क्षेत्र एक बार फिर धर्म परिवर्तन और सामाजिक बहिष्कार के संवेदनशील मुद्दे के कारण चर्चा में है। नारायणपुर जिले के एक गांव में धर्मांतरण के विवाद के चलते स्थानीय निवासियों ने 26 ईसाई परिवारों को गांव छोड़ने का आदेश दिया। इस आदेश के बाद पूरे क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया। हालांकि, जिला प्रशासन और पुलिस की मध्यस्थता के बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया और परिवारों को उनके घरों में लौटने की अनुमति दी गई, लेकिन अविश्वास की स्थिति अभी भी बनी हुई है।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह सामाजिक टकराव दिसंबर 2025 से शुरू हुआ था। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, गांव के मूल आदिवासी समुदाय और ईसाई धर्म अपनाने वाले समूहों के बीच लंबे समय से मतभेद थे। यह विवाद तब बढ़ गया जब ग्रामीणों ने दीपक ठाकुर और उनकी पत्नी को संदिग्ध धार्मिक गतिविधियों के आरोप में पकड़ लिया।
पुलिस कार्रवाई और जन आक्रोश
पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इस घटना के विरोध में जनजातीय मंच और अन्य समाज ने एक विशाल रैली निकाली और प्रशासन को अल्टीमेटम दिया। मूल आदिवासी समाज का आरोप है कि अवैध धर्मांतरण से उनकी पारंपरिक प्रथाएं और सांस्कृतिक पहचान खतरे में हैं। दूसरी ओर, ईसाई परिवारों का कहना है कि उन्हें उनकी धार्मिक आस्था के कारण प्रताड़ित किया जा रहा है।
आपातकालीन बैठक और समझौता
गांव की एक आपातकालीन बैठक में ईसाई परिवारों को तुरंत गांव छोड़ने का आदेश दिया गया। स्थिति को बिगड़ते देख पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया। देर रात दोनों पक्षों के बीच एक लिखित समझौता हुआ।
समझौते के अनुसार, ये 26 ईसाई परिवार गांव में रहने के लिए तो स्वतंत्र हैं, लेकिन उन्हें सामूहिक प्रार्थना या धार्मिक गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा, ग्रामीणों ने ईसाई धर्म अपनाने वाले लोगों को अपने मूल धर्म में लौटने के लिए एक महीने का समय दिया है।
विशेष ग्राम सभा की तैयारी
हालांकि पुलिस ने किसी भी बड़ी हिंसा से इनकार किया है, लेकिन गांव में तनाव को देखते हुए इसे छावनी में बदल दिया गया है। प्रशासन अब इस जटिल विवाद का स्थायी समाधान खोजने के लिए एक 'विशेष ग्राम सभा' बुलाने की योजना बना रहा है।