×

जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा बने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस

जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने सोमवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में शपथ ली। इस दौरान पंजाब सरकार ने उनकी नियुक्ति पर आपत्ति जताई है। जस्टिस मिश्रा का कार्यकाल कार्यवाहक चीफ जस्टिस के रूप में भी रहा है, और उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों में न्यायिक प्रशासन का कार्यभार संभाला है। उनकी नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बाद हुई है, लेकिन पंजाब सरकार ने इसे संघीय ढांचे का उल्लंघन बताया है।
 

जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा का शपथ ग्रहण


पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की खबर: जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने सोमवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में शपथ ली। यह शपथ पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने दिलाई। जस्टिस मिश्रा इससे पहले इस हाईकोर्ट में कार्यवाहक चीफ जस्टिस के रूप में कार्यरत थे। उनकी नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के लगभग एक महीने बाद हुई। शपथ ग्रहण समारोह पंजाब लोक भवन में आयोजित किया गया, जिसमें हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, राज्यपाल अशिम कुमार घोष, विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण और अन्य वरिष्ठ न्यायिक एवं प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए। हालांकि, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान इस समारोह में उपस्थित नहीं थे।


पंजाब सरकार की आपत्ति

जस्टिस मिश्रा की नियुक्ति से पहले पंजाब सरकार और केंद्र के बीच मतभेद उभर आए थे। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 6 अगस्त 2026 को जस्टिस मिश्रा को मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की थी, जिसके बाद केंद्र ने उनकी नियुक्ति की अधिसूचना जारी की। पंजाब सरकार ने आरोप लगाया कि उनकी नियुक्ति प्रक्रिया में राज्य की राय को नजरअंदाज किया गया। रविवार को पंजाब कैबिनेट ने एक आपात बैठक में केंद्र से इस नियुक्ति और शपथ ग्रहण को रोकने की मांग की। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसे संघीय ढांचे और राज्य के अधिकारों से संबंधित मुद्दा बताया।


कार्यवाहक चीफ जस्टिस के रूप में कार्यकाल

जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में 21 जुलाई 2025 को न्यायाधीश के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। इससे पहले, वह इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायाधीश रहे। जब जस्टिस शील नागू को सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत किया गया, तब जस्टिस मिश्रा ने जून 2026 में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश का कार्यभार संभाला। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में उन्होंने न्यायिक प्रशासन, अदालतों के बुनियादी ढांचे, पर्यावरण और न्याय तक पहुंच से संबंधित मामलों पर ध्यान दिया। उनके नेतृत्व में पीठ ने अवैध खनन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मामलों में सख्त रुख अपनाया।


जस्टिस मिश्रा का पेशेवर सफर

जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा का जन्म 16 नवंबर 1968 को हुआ। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज से अर्थशास्त्र में बीए ऑनर्स और कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी की डिग्री प्राप्त की। 8 मई 1993 को उन्होंने अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराया और दीवानी, संवैधानिक तथा सेवा मामलों में वकालत की। उन्होंने कई प्रमुख संस्थानों की ओर से मामलों की पैरवी की। 2013 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा दिया गया और 3 फरवरी 2014 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया।