जोधपुर झाल: प्रवासी पक्षियों के लिए नया आश्रय स्थल, वैज्ञानिक अध्ययन शुरू
प्रवासी पक्षियों के आगमन पर वैज्ञानिक अध्ययन
मथुरा: ब्रज क्षेत्र के प्रमुख वेटलैंड, जोधपुर झाल में प्रवासी पक्षियों के आगमन को देखते हुए जलीय पारिस्थितिकी तंत्र का वैज्ञानिक अध्ययन आरंभ किया गया है। यह अध्ययन उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद और वन विभाग द्वारा विकसित इस वेटलैंड की पारिस्थितिक स्थिति का मूल्यांकन करने के लिए किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रवासी मौसम में पक्षियों के लिए पर्याप्त खाद्य संसाधन और अनुकूल आवास सुनिश्चित करना है।
सितंबर में पक्षियों का आगमन और निरीक्षण
जोधपुर झाल में सालभर लगभग पांच हजार जलीय पक्षियों की उपस्थिति रहती है। इस बार सितंबर में ही प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू हो गया है, जिसके चलते वन विभाग ने पक्षियों के भोजन और जलीय आवास की स्थिति का आकलन करने का निर्णय लिया। इस प्रक्रिया में ईकोलॉजिस्ट डॉ. केपी सिंह के साथ कॉलेज ऑफ फिशरीज साइंस के डॉ. अंबरीश सिंह और डॉ. परमवीर सिंह ने वेटलैंड का निरीक्षण किया और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र, मछलियों की उपलब्धता और पक्षियों के खाद्य संसाधनों का अध्ययन किया।
मानसून के बाद जलभराव और आवास की स्थिति
कॉलेज ऑफ फिशरीज साइंस के डीन प्रो. नित्यानंद पांडे ने बताया कि डीएफओ मथुरा के अनुरोध पर विशेषज्ञों की टीम ने जोधपुर झाल के जलीय आवास और उसमें उपलब्ध खाद्य संसाधनों का अवलोकन किया है। मानसून की बारिश के बाद जलभराव से वेटलैंड का जलीय आवास पुनर्जीवित हुआ है। इस अध्ययन से प्रवासी पक्षियों के लिए भोजन की उपलब्धता की स्थिति स्पष्ट होगी, जिससे आवश्यक व्यवस्थापन किया जा सकेगा।
गर्मी में प्रवासी पक्षियों की उपस्थिति
बीआरडीएस के ईकोलॉजिस्ट डॉ. केपी सिंह ने बताया कि इस वर्ष गर्मी के मौसम में भी जोधपुर झाल पर कई प्रवासी पक्षियों की उपस्थिति सामान्य प्रवास अवधि से अधिक समय तक देखी गई। कुछ प्रजातियां गर्मी के दौरान भी यहां रुकी रहीं। वर्तमान में जोधपुर झाल पर नॉर्दर्न पिनटेल, कॉमन टील, गार्गेनी, कॉमन रेडशैंक, स्पॉटेड रेडशैंक, लिटिल रिंग्ड प्लोवर, केंटिश प्लोवर, कॉमन सैंडपाइपर, ग्रीनशैंक और वैगटेल समेत कई प्रवासी पक्षी देखे जा रहे हैं। विशेषज्ञों का यह अध्ययन आगामी प्रवासी मौसम में इन पक्षियों के संरक्षण और उनके अनुकूल वातावरण बनाए रखने में सहायक होगा।