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झारखंड में छात्रों की मांगों पर सरकार की संवेदनशीलता की आवश्यकता

झारखंड में छात्रों का प्रदर्शन बढ़ता जा रहा है, जिसमें उनकी मांगों को नजरअंदाज करने का आरोप सरकार पर लगाया जा रहा है। 'कॉकरोच' आंदोलन के तहत, छात्रों ने परीक्षा में धांधली और भर्ती परीक्षाओं की नियमितता की कमी के खिलाफ आवाज उठाई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की असंवेदनशीलता के चलते छात्रों में आक्रोश बढ़ रहा है। क्या सरकार इस मुद्दे पर ध्यान देगी? जानें पूरी कहानी में।
 

छात्रों की समस्याओं पर ध्यान देने की आवश्यकता


झारखंड सरकार को छात्रों के प्रति अधिक संवेदनशीलता दिखाने की आवश्यकता है। कांग्रेस जैसे सहयोगी दलों को भी इस दिशा में कदम उठाने चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि विपक्ष और सत्ताधारी दलों में क्या अंतर है।


हाल ही में 'कॉकरोच' आंदोलन ने केंद्र में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के लिए नई चुनौतियाँ पेश की हैं, जिसमें विपक्षी दलों ने अपने लाभ की संभावना देखी है। लेकिन इन दलों को यह समझना चाहिए कि युवा आक्रोश केवल राजनीतिक दायरे में सीमित नहीं है। इसकी जड़ें अवसरहीनता, जवाबदेही की कमी और सरकारी असंवेदनशीलता में हैं। इसलिए, जिन राज्यों में गैर-भाजपा सरकारें हैं, उन्हें ऐसे मुद्दों पर सहानुभूतिपूर्ण रुख अपनाना चाहिए।


झारखंड के छात्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन उनकी मांगों के प्रति असंवेदनशील बने हुए हैं। रांची में 29 जुलाई से सिविल सेवा और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों का प्रदर्शन जारी है।


यह विवाद तब शुरू हुआ जब झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम आया, जिसमें गड़बड़ियों के आरोप लगे। इसके अलावा, झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा-2025 में भी धांधली के आरोप सामने आए हैं। जेपीएससी परीक्षा कांड में कई लोग गिरफ्तार हुए हैं, लेकिन छात्रों की मांग है कि इस परीक्षा को रद्द किया जाए। छात्र संगठनों ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की भी मांग की है।


छात्रों की शिकायतें यह भी हैं कि झारखंड में भर्ती परीक्षाएं नियमित नहीं होतीं। कई बार परीक्षाओं को पिछले साल की भर्ती से जोड़ दिया जाता है, जिससे उम्मीदवारों की उम्र सीमा प्रभावित होती है। भाजपा शासित राज्यों में ऐसी शिकायतों पर कठोर रुख देखने को मिला है। यदि गैर-भाजपा सरकारें भी ऐसा ही रुख अपनाती हैं, तो युवा आक्रोश का केंद्र पूरा राजनीतिक वर्ग बन सकता है। इसलिए, झारखंड सरकार को छात्रों के प्रति अधिक संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।