झारखंड राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग का विवाद: कांग्रेस और सहयोगियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप
राजनीतिक बहस का नया मोड़
रांची: झारखंड में राज्यसभा चुनाव के परिणामों के बाद क्रॉस वोटिंग के आरोपों ने इंडिया गठबंधन के भीतर नई राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दिया है। कांग्रेस ने अपने सहयोगी दलों पर सवाल उठाए हैं, जबकि अन्य घटक दल इन आरोपों को नकार रहे हैं। यह विवाद झारखंड की राजनीति के साथ-साथ विपक्षी एकता पर भी चर्चा को बढ़ावा दे रहा है।
भूपेश बघेल का बयान
कांग्रेस के पर्यवेक्षक और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि कांग्रेस के विधायकों ने पार्टी उम्मीदवार का समर्थन किया, लेकिन सहयोगी दलों के कुछ वोट अपेक्षित नहीं रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि क्रॉस वोटिंग सहयोगी दलों की ओर से हुई है और भाजपा ने धनबल का इस्तेमाल कर चुनावी समीकरण को प्रभावित करने की कोशिश की।
भिलाई में पत्रकारों से बातचीत में बघेल ने कहा कि भाजपा ने अपने उम्मीदवार को मैदान में नहीं उतारा, बल्कि एक निर्दलीय उम्मीदवार का समर्थन किया। उन्होंने विधायकों पर दबाव और प्रलोभन के इस्तेमाल का आरोप लगाया, यह कहते हुए कि राजनीति में विचारधारा की जगह धनबल का बढ़ावा देना लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है।
इरफान अंसारी का बयान
झारखंड सरकार के मंत्री और कांग्रेस नेता इरफान अंसारी ने भी गठबंधन के कुछ सहयोगियों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने कठिन समय में अपने सहयोगियों का साथ दिया, लेकिन राज्यसभा चुनाव में अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। अंसारी ने चेतावनी दी कि ऐसे कदम विपक्षी एकता को कमजोर कर सकते हैं और भाजपा को राजनीतिक लाभ पहुंचा सकते हैं।
गठबंधन के अन्य दलों का जवाब
हालांकि, गठबंधन के अन्य दलों ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज कर दिया है। CPI(ML) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि उनकी पार्टी के विधायकों ने कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार को ही वोट दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी अनुशासन का पालन किया गया और क्रॉस वोटिंग के आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है।
राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने भी कांग्रेस के दावों को गलत बताया। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव भोला यादव ने कहा कि उनके सभी चार विधायकों ने इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया। उन्होंने यह भी कहा कि वह स्वयं चुनाव के दौरान पर्यवेक्षक के रूप में मौजूद थे।
सीएम हेमंत सोरेन की बैठक
इस विवाद के बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास पर झामुमो और कांग्रेस नेताओं की बैठक हुई। बैठक में चुनाव परिणामों और गठबंधन की स्थिति पर चर्चा की गई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम के बाद गठबंधन के भीतर आत्ममंथन और वोटिंग पैटर्न की समीक्षा की संभावना बढ़ गई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि कांग्रेस अपनी जांच में किस निष्कर्ष पर पहुंचती है और सहयोगी दल इस विवाद को कैसे सुलझाते हैं।