ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर में चांदी के रथ पर विवाद: जांच समिति की कार्रवाई जारी
वृंदावन में चांदी के रथ का विवाद गहराया
वृंदावन: ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर में जगन्नाथ रथयात्रा जैसे उत्सवों के दौरान चांदी के रथ और सिंहासन को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। उच्च स्तरीय समिति के निर्देश पर जांच टीम ने मामले की जांच को तेज कर दिया है। रविवार को सीओ वृंदावन संदीप सिंह और अपर नगर मजिस्ट्रेट रामप्रसाद त्रिपाठी ने पुलिस बल के साथ सेवायत गोस्वामियों के निवास पर जांच के लिए कदम रखा।
जांच समिति का सेवायत गोस्वामियों के घर दौरा
अधिकारियों ने सेवायत गोस्वामियों से चांदी के रथ और अन्य सामग्री के बारे में जानकारी मांगी, लेकिन सेवायतों ने लिखित नोटिस की अनुपस्थिति का हवाला देते हुए सामग्री दिखाने से मना कर दिया। इसके बाद अधिकारी लौट गए।
लिखित नोटिस की मांग पर सेवायतों का विरोध
सेवायतों का कहना है कि बिना लिखित आदेश के उनके निजी आवास पर पहुंचकर सामग्री दिखाने की मांग उचित नहीं है। इसके बाद अधिकारियों ने सेवायतों को नोटिस जारी किया है।
इस नोटिस में चांदी के रथ, सिंहासन और अन्य दान सामग्री से संबंधित जानकारी और दस्तावेज मांगे गए हैं। भक्तों से दान में प्राप्त सामग्री की रसीद और अभिलेख भी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
चांदी के रथ का वजन और विवाद
मंदिर के सेवायत अधिकारी ज्ञानेंद्र गोस्वामी और बृजेन्द्र किशोर गोस्वामी द्वारा रथयात्रा और अन्य प्रमुख उत्सवों पर भक्तों के दान से प्राप्त चांदी का रथ सजाया जाता रहा है। बताया जा रहा है कि इस वर्ष लगभग 200 किलो वजनी चांदी का रथ जगन्नाथ रथयात्रा के दौरान नहीं सजाया गया था, जिसके बाद यह मामला उच्चतम न्यायालय तक पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जांच समिति का गठन
उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, हाई पावर्ड कमेटी ने एमवीडीए उपाध्यक्ष लक्ष्मी नागप्पन की अध्यक्षता में जांच समिति का गठन किया था। इसमें वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार और नगर आयुक्त ओजस्वी राज को सदस्य बनाया गया।
इसी जांच के तहत रविवार को सीओ वृंदावन और अपर नगर मजिस्ट्रेट सेवायत गोस्वामियों के निवास पर पहुंचे थे।
सेवायतों से मांगे गए दस्तावेज
सीओ वृंदावन संदीप सिंह ने बताया कि हाई पावर्ड कमेटी को चांदी के रथ के संबंध में शिकायत मिली थी। शिकायत में कहा गया था कि इस बार जगन्नाथ रथयात्रा के दौरान ठाकुर बांके बिहारी महाराज के समक्ष चांदी का रथ नहीं सजाया गया।
उन्होंने बताया कि इसी शिकायत की जांच के लिए अधिकारियों की टीम सेवायत गोस्वामी के निवास पर पहुंची थी। बाद में सेवायतों को पत्र देकर स्पष्ट करने के लिए कहा गया है कि चांदी का रथ किसका है, वर्तमान में कहां रखा गया है और उससे संबंधित अन्य सामग्री की स्थिति क्या है।
गोस्वामी समाज की नाराजगी
इस कार्रवाई को लेकर सेवायत गोस्वामी समाज में नाराजगी देखी जा रही है। गोस्वामी समाज का कहना है कि किसी सेवायत के घर पुलिस बल के साथ पहुंचना उचित प्रक्रिया नहीं है।
प्रबंधन समिति के सदस्य हिमांशु गोस्वामी ने जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक अगस्त को गठित जांच समिति में एमवीडीए उपाध्यक्ष, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और नगर आयुक्त को नामित किया गया था। ऐसे में सीओ वृंदावन और अपर नगर मजिस्ट्रेट किस अधिकार और आदेश के तहत जांच के लिए पहुंचे, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए।
सेवायतों के जवाब का इंतजार
चांदी के रथ और सिंहासन को लेकर शुरू हुई जांच अब मंदिर प्रबंधन और सेवायत गोस्वामी समाज के बीच नए विवाद का कारण बनती दिखाई दे रही है। नोटिस जारी होने के बाद सेवायतों की ओर से दिए जाने वाले जवाब और जांच समिति की अगली कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।