तमिलनाडु की राजनीति में नया मोड़: एक वोट से हार पर हाईकोर्ट में चुनौती
विजय शपथ समारोह में हलचल
तमिलनाडु की राजनीतिक स्थिति में हाल ही में काफी हलचल देखने को मिली है। तिरुपत्तुर विधानसभा सीट पर हुए चुनाव में बेहद करीबी मुकाबले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। डीएमके के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री के.आर. पेरियाकरुप्पन ने एक वोट से हुई हार को मद्रास हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
तिरुपत्तुर सीट पर एक वोट से हार
तिरुपत्तुर विधानसभा क्षेत्र में हुए चुनाव में डीएमके नेता के.आर. पेरियाकरुप्पन को केवल एक वोट से हार का सामना करना पड़ा। टीवीके के उम्मीदवार सीनिवासा सेथुपति ने इस बेहद करीबी मुकाबले में जीत हासिल की।
इतने कम अंतर से हार के बाद, पेरियाकरुप्पन ने चुनाव परिणाम पर सवाल उठाते हुए कानूनी कार्रवाई का सहारा लिया है। उन्होंने मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुनाव परिणाम की पुनरावलोकन की मांग की है।
विश्वास मत पर रोक लगाने की मांग
अपनी याचिका में, के.आर. पेरियाकरुप्पन ने यह भी अनुरोध किया है कि विजेता घोषित किए गए सीनिवासा सेथुपति को विधानसभा में होने वाले विश्वास मत में भाग लेने से रोका जाए।
उनका कहना है कि जब तक चुनाव परिणाम को लेकर उठे सवालों पर स्पष्ट निर्णय नहीं हो जाता, तब तक उन्हें विश्वास मत प्रक्रिया से दूर रखा जाना चाहिए।
हाईकोर्ट में सुनवाई का समय
मामले की गंभीरता को देखते हुए, मद्रास हाईकोर्ट ने गर्मियों की छुट्टियों के बावजूद विशेष बेंच का गठन किया है। इस याचिका पर आज सुबह 10:30 बजे सुनवाई निर्धारित की गई है।
राजनीतिक दृष्टिकोण से यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका प्रभाव विधानसभा की कार्यवाही और विश्वास मत की प्रक्रिया पर पड़ सकता है।
तमिलनाडु की राजनीति में बढ़ती हलचल
डीएमके के वरिष्ठ नेता के.आर. पेरियाकरुप्पन ने लंबे समय से तिरुपत्तुर सीट पर मजबूत पकड़ बना रखी है। ऐसे में, बेहद मामूली अंतर से मिली हार ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है।
वहीं, टीवीके के उम्मीदवार सीनिवासा सेथुपति को आधिकारिक रूप से विजेता घोषित किया जा चुका है। यदि अदालत उनकी विधानसभा प्रक्रिया में भागीदारी पर रोक लगाती है, तो इसका सीधा असर राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है।
टीवीके को मिला समर्थन
आपको यह जानकर अच्छा लगेगा कि विजय की टीवीके के पास 107 विधायक हैं। इसके अलावा, कांग्रेस के पांच विधायक, भाकपा और माकपा के दो-दो विधायक, जबकि वीसीके और आईयूएमएल के दो-दो विधायकों का समर्थन भी पार्टी को प्राप्त है। हालांकि, भाकपा ने स्पष्ट कर दिया है कि वह मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होगी।