तमिलनाडु में भाजपा की चुनावी रणनीति पर संकट
भाजपा की मेहनत और अन्नामलाई का निर्णय
तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी ने चुनावी मैदान में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए काफी प्रयास किए हैं। विशेष रूप से अमित शाह ने इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भाजपा ने अन्ना डीएमके के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिसमें अन्ना डीएमके से अलग हुए नेताओं को वापस एनडीए में लाने का प्रयास शामिल है। इसके अलावा, यह भी चर्चा में है कि फिल्म अभिनेता विजय की पार्टी बनाने और प्रशांत किशोर को उनके चुनावी रणनीतिकार के रूप में लाने में भाजपा की भूमिका हो सकती है। यदि चुनाव त्रिकोणीय होता है, तो इसका लाभ एनडीए को मिल सकता है।
हालांकि, भाजपा को इस रणनीति के बीच एक बड़ा झटका लगा है। पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई ने चुनावी प्रक्रिया से खुद को अलग कर लिया है। अन्नामलाई को पार्टी ने छह विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी सौंपी थी, जबकि गठबंधन में भाजपा को कुल 30 सीटें मिलेंगी। लेकिन अन्नामलाई ने अपने पिता की स्वास्थ्य स्थिति का हवाला देते हुए खुद को अलग किया है। इसके साथ ही, यह भी कहा जा रहा है कि उन्हें पार्टी में लगातार अनदेखी का सामना करना पड़ रहा है। अन्ना डीएमके के साथ तालमेल और नयनार नागेंद्रन के अध्यक्ष बनने के बाद उनकी स्थिति कमजोर हुई है। राज्यसभा के लिए भी उनका नाम कहीं नहीं चल रहा है। हालांकि, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की टीम में शामिल होने की चर्चा है, लेकिन ऐसा लगता है कि उन्होंने अपनी नाराजगी जताने या दबाव बनाने के लिए यह कदम उठाया है।