तमिलनाडु सरकार ने छात्रों के राजनीतिक प्रदर्शनों पर रोक लगाने वाला आदेश वापस लिया
राजनीतिक प्रदर्शनों में छात्रों की भागीदारी पर नया मोड़
नई दिल्ली: तमिलनाडु सरकार ने छात्रों को राजनीतिक प्रदर्शनों में भाग लेने से रोकने के लिए जारी किया गया विवादास्पद आदेश वापस ले लिया है। यह आदेश 14 अगस्त को जारी किया गया था, जिसमें छात्रों को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और वामपंथी दलों द्वारा आयोजित आंदोलनों में शामिल होने से रोकने का निर्देश दिया गया था। अब, सरकार ने अपना निर्णय बदलते हुए इस आदेश को रद्द कर दिया है। तमिलनाडु शिक्षा विभाग की ज्वाइंट डायरेक्टर सिंथिया सेल्वी ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि 14 अगस्त का आदेश बुधवार, 19 अगस्त को वापस ले लिया गया है, जिससे अब छात्रों को राजनीतिक प्रदर्शनों से दूर रखने वाला यह निर्देश लागू नहीं रहेगा।
The Department of Collegiate Education has withdrawn its earlier directive seeking coordinated action to prevent students of government arts and science colleges and youth from participating in protests and agitations.
— News Media (@ANI) August 19, 2026
In an order issued on Tuesday, Joint Director of Collegiate… https://t.co/ISiT0SjN9M pic.twitter.com/hokeN53RUx
क्या था पूरा मामला?
14 अगस्त को राज्य की सभी विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रारों को एक आदेश भेजा गया था, जिसमें छात्रों को राजनीतिक आंदोलनों और प्रदर्शनों में भाग लेने से रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया गया था। इस आदेश में स्कूल शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन को आपसी तालमेल के साथ इस पर नजर रखने के निर्देश दिए गए थे।
The Directorate of Collegiate Education (DCE) has directed the School Education Department, Higher Education Department, Police Department, and district administration to coordinate and take joint measures to prevent students and youth from participating in protests and agitation… pic.twitter.com/xUOoHknoNB
— News Media (@ANI) August 19, 2026
सरकार ने अधिकारियों और शैक्षणिक संस्थानों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा था कि छात्र राजनीतिक संगठनों के बैनर तले होने वाले प्रदर्शनों, आंदोलनों और हड़तालों में हिस्सा न लें। हालांकि, इस निर्देश के सामने आने के बाद राज्य में राजनीतिक विवाद उत्पन्न हो गया था।
CJP ने जताया था कड़ा विरोध
CJP ने सरकार के आदेश का खुलकर विरोध किया था, इसे गैर-संवैधानिक बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की थी। CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा था कि किसी भी सरकार को किसी व्यक्ति के शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर रोक लगाने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखना हर नागरिक का अधिकार है। पार्टी के विरोध के बाद यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया था।
NEET विरोध के बीच आया था आदेश
यह विवाद उस समय सामने आया जब तमिलनाडु में NEET को लेकर विरोध-प्रदर्शन चल रहे थे। CJP और वामपंथी दलों से जुड़े छात्र संगठन NEET को खत्म करने की मांग कर रहे थे। ऐसे में छात्रों को इन प्रदर्शनों में शामिल होने से रोकने का सरकारी निर्देश सीधे तौर पर राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया।
सरकार के आदेश की आलोचना करने वालों ने इसे छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर देखा, जबकि सरकार ने इस तरह के निर्देश का उद्देश्य छात्रों को राजनीतिक गतिविधियों से दूर रखना बताया था।
पहले भी छात्रों के मामलों में लिया था फैसला
दिलचस्प बात यह है कि छात्रों से जुड़े विरोध-प्रदर्शनों के मामले में विजय सरकार पहले भी नरम रुख दिखा चुकी है। सरकार ने एंटी-NEET प्रदर्शनों के दौरान छात्रों के खिलाफ दर्ज पुराने पुलिस मामलों को वापस लेने का निर्देश दिया था। अब 14 अगस्त के आदेश को वापस लिए जाने के बाद सरकार के रुख में एक और बदलाव देखने को मिला है। हालांकि, आदेश वापस लेने के पीछे सरकार की ओर से विस्तृत कारण सामने नहीं आया है, लेकिन CJP और अन्य संगठनों के विरोध के बीच यह फैसला राज्य में चर्चा का विषय बन गया है।