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त्योहारों में ऑनलाइन खरीदारी: साइबर ठगी से बचने के उपाय

त्योहारों के मौसम में ऑनलाइन खरीदारी के दौरान साइबर ठग सक्रिय हो जाते हैं। इस लेख में जानें कि कैसे आप फर्जी वेबसाइटों और धोखाधड़ी से बच सकते हैं। आईएफएसओ के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त संजय भाटिया की सलाह के अनुसार, ग्राहकों को सतर्क रहना चाहिए और किसी भी संदिग्ध ऑफर पर तुरंत निर्णय लेने से बचना चाहिए। जानें कि कैसे एक छोटी सी गलती आपको बड़ी ठगी का शिकार बना सकती है और क्या करें यदि आप ठगी का शिकार हो जाते हैं।
 

साइबर ठगों का त्योहारों में सक्रिय होना


नई दिल्ली: जैसे ही त्योहारों का मौसम आता है, बाजारों में हलचल बढ़ जाती है और ऑनलाइन खरीदारी में भी छूट और ऑफर्स की भरमार होती है। मोबाइल स्क्रीन पर 70 से 80 प्रतिशत तक की छूट और नामी ब्रांड्स के उत्पाद बेहद कम कीमत पर देखकर ग्राहक बिना सोचे-समझे खरीदारी करने लगते हैं। लेकिन यही जल्दबाजी साइबर ठगों के लिए एक सुनहरा अवसर बन जाती है। ये ठग त्योहारों के उत्साह का लाभ उठाने के लिए तैयार रहते हैं, फर्जी वेबसाइटों और भ्रामक विज्ञापनों के माध्यम से लोगों को आकर्षित करते हैं। जब ग्राहक लालच में आकर लिंक पर क्लिक करता है या भुगतान करता है, तो उसे सस्ते सामान के बजाय साइबर ठगी का महंगा बिल मिल सकता है।


सावधानी बरतने की सलाह

इतना सस्ता कि शक होना चाहिए


आईएफएसओ के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त संजय भाटिया ने ऑनलाइन खरीदारी के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति या वेबसाइट किसी महंगे सामान को असामान्य रूप से कम कीमत में बेचने का दावा करती है, तो ग्राहक को तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए।


उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति यह कहता है कि वह बाजार मूल्य से बहुत कम में महंगा टेलीविजन या अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान उपलब्ध कराएगा, तो ग्राहक को सजग रहना चाहिए। खासकर जब उस ऑफर में किसी प्रसिद्ध ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म का नाम शामिल हो।


फर्जी वेबसाइटों से बचें

संजय भाटिया के अनुसार, ठग अक्सर असली शॉपिंग प्लेटफॉर्म के नाम से मिलती-जुलती वेबसाइटें बनाते हैं। ये वेबसाइटें देखने में असली लग सकती हैं, लेकिन उनके वेब पते में एक-दो अक्षर बदल दिए जाते हैं या नाम की वर्तनी गलत होती है। ग्राहक इस छोटे से अंतर को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे ठगी का रास्ता खुल जाता है।


एक अक्षर का फर्क, खाते पर बड़ा असर


उपभोक्ताओं को वेबसाइट का नाम और यूआरएल ध्यान से जांचना चाहिए। यदि किसी नाम की स्पेलिंग संदिग्ध है या वेबसाइट का पता असामान्य है, तो उस पर क्लिक नहीं करना चाहिए। बेहतर है कि ग्राहक किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने के बजाय संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट को स्वयं खोजें।


कैश ऑन डिलीवरी का भरोसा नहीं

संजय भाटिया ने बताया कि साइबर ठग ग्राहकों का विश्वास जीतने के लिए कई तरीके अपनाते हैं। कभी-कभी वे कैश ऑन डिलीवरी जैसी सुविधाओं का हवाला देते हैं। इसलिए केवल भुगतान के तरीके को देखकर किसी वेबसाइट को असली मान लेना उचित नहीं है।


उपभोक्ताओं को वेबसाइट की प्रमाणिकता, कंपनी की पहचान और भुगतान प्रक्रिया की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए। विश्वसनीय डिजिटल भुगतान प्रणालियों में कई सत्यापन प्रक्रियाएं होती हैं।


लालच से बचें

लालच की एक क्लिक वाली कहानी से बचिए


साइबर ठग अक्सर संदेश भेजकर कहते हैं, "आज आखिरी मौका", "सिर्फ कुछ घंटे बाकी", "स्टॉक खत्म होने वाला है"। इन शब्दों के जरिए ग्राहक पर तुरंत निर्णय लेने का दबाव बनाया जाता है।


पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यही जल्दबाजी ठगी का सबसे बड़ा कारण बनती है। ग्राहक को ऑफर कितना भी आकर्षक क्यों न लगे, भुगतान करने से पहले वेबसाइट की सत्यता जांचना आवश्यक है।


साइबर ठगी की रिपोर्टिंग

ठगी हो जाए तो इंतजार नहीं, तुरंत कार्रवाई


यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन वित्तीय ठगी होती है, तो उसे घबराने के बजाय तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। पुलिस की सलाह है कि साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत 1930 पर शिकायत करें और संबंधित साइबर अपराध पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराएं।


साइबर सुरक्षा का त्योहार स्पेशल मंत्र


ऑफर देखो, मगर जांच के बाद;
लिंक खोलो, मगर पहचान के बाद;
पैसा भेजो, मगर भरोसेमंद प्लेटफॉर्म पर;
वरना त्योहार की खरीदारी बदल सकती है साइबर ठगी की कहानी में!