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त्रिपुरा विधानसभा में रामपदा जमातिया बने नए अध्यक्ष

त्रिपुरा की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटना के तहत, रामपदा जमातिया को विधानसभा का अध्यक्ष निर्विरोध चुना गया है। भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा था। यह चुनाव पूर्व अध्यक्ष बिस्वा बंधु सेन के निधन के बाद आवश्यक हो गया था। जमातिया, जो पहले जनजातीय कल्याण मंत्री रह चुके हैं, विधानसभा में दूसरी बार विधायक चुने गए हैं। इस बीच, त्रिपुरा विधानसभा का बजट सत्र भी शुरू हो चुका है, जिसमें कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाएंगे।
 

रामपदा जमातिया का निर्विरोध चुनाव

त्रिपुरा की राजनीतिक स्थिति में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है, जब वरिष्ठ भाजपा विधायक रामपदा जमातिया को बुधवार को त्रिपुरा विधानसभा का अध्यक्ष निर्विरोध चुना गया।


भाजपा और उसके सहयोगी दल, टिपरा मोथा पार्टी (टीएमपी) और इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) ने 12 मार्च को उनके नाम का प्रस्ताव रखा, जिसके बाद उन्होंने अध्यक्ष पद के लिए नामांकन भरा।


यह चुनाव पूर्व विधानसभा अध्यक्ष बिस्वा बंधु सेन के 26 दिसंबर को निधन के बाद आवश्यक हो गया था। 72 वर्षीय सेन का बेंगलुरु के एक निजी अस्पताल में लंबे इलाज के बाद निधन हुआ।


कार्यवाहक अध्यक्ष राम प्रसाद पॉल ने सदन में यह घोषणा की कि जमातिया एकमात्र उम्मीदवार थे, इसलिए उन्हें निर्विरोध अध्यक्ष घोषित किया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री माणिक साहा, विपक्ष के नेता जितेंद्र चौधरी और कांग्रेस विधायक दल के नेता बिराजित सिन्हा समेत अन्य नेताओं ने उन्हें अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचाया।


रामपदा जमातिया 2022 से 2023 तक जनजातीय कल्याण, उद्योग एवं वाणिज्य (हथकरघा, हस्तशिल्प और रेशम) मंत्री रह चुके हैं।


वे 1972 में त्रिपुरा को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने के बाद विधानसभा अध्यक्ष बनने वाले दूसरे जनजातीय नेता हैं। इससे पहले सुधन्वा देबबर्मा 1978 से 1983 तक इस पद पर रहे।


69 वर्षीय जमातिया गोमती जिले के बागमा विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक (2018 और 2023) चुने गए हैं। उन्होंने 2017 में ओएनजीसी से सेवानिवृत्ति के बाद भाजपा में शामिल होने का निर्णय लिया।


त्रिपुरा विधानसभा का बजट सत्र 13 मार्च से प्रारंभ हो चुका है। राज्य के वित्त मंत्री प्रणजीत सिंघा रॉय ने 16 मार्च को 2026-27 के लिए 34,212.31 करोड़ रुपये का कर-मुक्त घाटे वाला बजट पेश किया।


यह सत्र 25 मार्च तक चलेगा, जिसमें कई महत्वपूर्ण विधेयक भी पेश किए जाएंगे, जिनमें त्रिपुरा महिला विश्वविद्यालय, स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय और तकनीकी विश्वविद्यालय की स्थापना शामिल है.