दिल्ली के जंतर-मंतर विवाद में स्वतंत्र भारद्वाज को मिली अंतरिम जमानत, जानें पूरा मामला
स्वतंत्र भारद्वाज को मिली राहत
नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुई मारपीट और विवादास्पद बयानों के मामले में आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को पटियाला हाउस कोर्ट से महत्वपूर्ण राहत मिली है। अदालत ने मामले की गंभीरता और कानूनी पहलुओं पर विचार करते हुए उन्हें तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत प्रदान की है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के दौरान घटित इस घटना ने देशभर में राजनीतिक और सामाजिक हलचल मचा दी थी, खासकर जब इसका एक पॉडकास्ट वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
अदालत का निर्णय और आरोप
पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरव प्रताप सिंह लालर की पीठ ने स्वतंत्र भारद्वाज को राहत देने का आदेश दिया। उन पर जंतर-मंतर पर एक नाबालिग के पिता के साथ मारपीट करने, आपत्तिजनक टिप्पणियां करने के साथ-साथ SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम और लैंगिक अपराधों से बाल संरक्षण अधिनियम जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।
जंतर-मंतर विवाद का विवरण
निचली अदालत ने स्वतंत्र भारद्वाज को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेजा था। इसके बाद उनके वकीलों ने दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया। स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की वैधानिकता को चुनौती देते हुए एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका भी दायर की गई थी। उच्च न्यायालय ने इस याचिका की महत्ता को स्वीकार करते हुए तत्काल सुनवाई की अनुमति दी। यह याचिका तब दायर की जाती है जब किसी व्यक्ति को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखने का संदेह होता है।
गिरफ्तारी का संदर्भ और विवाद की शुरुआत
यह विवाद जंतर-मंतर पर एक विरोध प्रदर्शन के दौरान शुरू हुआ, जब एक पॉडकास्ट वीडियो सामने आया। वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों और सीजेपी के कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया। इसके बाद पीड़ित नाबालिग लड़की के पिता की शिकायत पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), पोक्सो कानून और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। दिल्ली पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज को 5 सितंबर को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें अब तीन हफ्ते की अंतरिम राहत मिली है।