दिल्ली पुलिस का बड़ा ऑपरेशन: 944 साइबर ठग गिरफ्तार, 4,002 शिकायतें निपटाई
साइबर अपराध के खिलाफ दिल्ली पुलिस की सख्त कार्रवाई
नई दिल्ली: साइबर अपराध की दुनिया में अब केवल फोन करने वाले ठग ही नहीं, बल्कि उनके पीछे का पूरा नेटवर्क भी दिल्ली पुलिस के निशाने पर है। बैंक खातों की अवैध खरीद-फरोख्त, फर्जी सिम कार्ड, बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत, अवैध कॉल सेंटर और ठगी की रकम को नकद, सोने और क्रिप्टोकरेंसी में बदलने वाले संगठित गिरोहों के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने एक महत्वपूर्ण अभियान चलाया है। ऑपरेशन साइहॉक-6.0 के तहत पुलिस ने 944 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि 788 लोगों पर पाबंदियां लगाई गई हैं और 2,081 अन्य को नोटिस जारी किए गए हैं।
दिल्ली पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में संयुक्त पुलिस आयुक्त आईएफएसओ चिन्मय बिस्वाल और नई दिल्ली रेंज ज्वाइंट सीपी नूपुर प्रसाद ने बताया कि 28 और 29 अक्टूबर 2026 को चलाए गए इस विशेष अभियान के दौरान पुलिस ने 4,002 राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) शिकायतों को जोड़ा और उनका खुलासा किया। इन शिकायतों में लगभग 479.14 करोड़ रुपये की ठगी की रकम सामने आई है। इस अभियान में 1,032 मामलों में कार्रवाई की गई, जिनमें 596 नए मुकदमे, 432 पुराने मामले और चार कलंदरियां शामिल हैं।
दिल्ली से बाहर तक फैला पुलिस का शिकंजा
साइबर ठग एक राज्य में बैठकर दूसरे राज्यों के नागरिकों को निशाना बनाते हैं और ठगी की रकम को विभिन्न राज्यों में फैले बैंक खातों के माध्यम से इधर-उधर कर देते हैं। इसी नेटवर्क को तोड़ने के लिए दिल्ली पुलिस की 283 विशेष टीमों ने देश के 17 राज्यों और पांच केंद्रशासित प्रदेशों में छापेमारी की। केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक से लेकर जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा तक पुलिस ने आरोपियों की तलाश में दबिश दी। इस कार्रवाई में झारखंड के धनबाद में जामताड़ा से जुड़े क्रेडिट कार्ड ठगी गिरोह, दुर्ग-भिलाई में विवाह संबंधी धोखाधड़ी करने वाले गिरोह, कानपुर और ग्रेटर नोएडा में बैंक खातों की आपूर्ति करने वाले नेटवर्क तथा मुंबई, लखनऊ, राजस्थान और पंजाब में खातों की व्यवस्था करने वाले मददगारों तक पुलिस पहुंची।
बैंक खातों से लेकर सिम कार्ड तक, हर कड़ी पर प्रहार
पुलिस की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि साइबर ठगी अब किसी एक व्यक्ति का अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित कारोबार की तरह संचालित हो रही है। इसमें विभिन्न व्यक्तियों की जिम्मेदारियां तय होती हैं। कुछ लोग फर्जी कंपनियां बनाकर बैंक खाते खुलवाते हैं, कुछ कमीशन पर खाते उपलब्ध कराते हैं, कुछ बैंक के भीतर बैठकर नियमों को दरकिनार करने में मदद करते हैं, और कुछ ग्राहकों के नाम पर अतिरिक्त सिम कार्ड जारी करते हैं। कुछ गिरोह इन खातों के माध्यम से ठगी की रकम मंगवाते हैं और फिर एटीएम, चेक, नकदी निकासी, सोने की खरीद और यूएसडीटी क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से रकम को ठिकाने लगाते हैं।
दिल्ली पुलिस ने इस बार केवल ठगों को पकड़ने तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी, बल्कि उनके आर्थिक और तकनीकी ढांचे को भी निशाना बनाया। उत्तर-पश्चिम जिले में बैंक अधिकारियों की कथित मिलीभगत से म्यूल खाते खुलवाने का मामला सामने आया। दक्षिण जिले ने सेवा एजेंसियों के ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की, जिन पर ग्राहकों के निजी डाटा का दुरुपयोग करने का आरोप है। बाहरी-उत्तर जिले ने दूसरे लोगों की पहचान पर धोखाधड़ी से सिम कार्ड हासिल करने वाले नेटवर्क का पर्दाफाश किया। दक्षिण-पश्चिम और उत्तर जिले ने कई स्तरों पर बैंक खातों में घूम रही ठगी की रकम का पता लगाया।
फर्जी ऐप, डिजिटल गिरफ्तारी और निवेश के नाम पर ठगी करने वालों पर कार्रवाई
ऑपरेशन के दौरान अलग-अलग जिलों ने साइबर अपराध के कई तरीकों का खुलासा किया। दक्षिण-पश्चिम जिले ने फर्जी मोबाइल ऐप और फिशिंग संदेशों के जरिए ठगी करने वालों पर कार्रवाई की। शाहदरा जिले ने फर्जी केवाईसी कॉल के मामलों में शिकंजा कसा। मध्य, शाहदरा और दक्षिण-पूर्व जिले ने खुद को कॉरपोरेट अधिकारी, सरकारी कर्मचारी और भुगतान कंपनियों का प्रतिनिधि बताकर लोगों को ठगने वाले गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई की। उत्तर, मध्य, उत्तर-पूर्व और रोहिणी जिलों ने ऑनलाइन खरीदारी, निवेश और विवाह संबंधी धोखाधड़ी के मामलों में कार्रवाई की, जबकि बाहरी जिले ने ऋण ऐप के जरिए यौन शोषण की धमकी देकर वसूली करने वाले गिरोहों को निशाना बनाया। दक्षिण जिले ने बच्चों से संबंधित यौन शोषण सामग्री के संबंध में साइबर टिपलाइन से मिले इनपुट पर भी कार्रवाई की।
चलती गाड़ी में चल रहा था फर्जी कॉल सेंटर
साइबर ठगों ने पुलिस की निगरानी से बचने के लिए नए तरीके अपनाए थे। पूर्वी जिले ने एक अवैध कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया, जिसे स्थायी ठिकाने के बजाय चलती गाड़ी से संचालित किया जा रहा था, ताकि उसकी लोकेशन का पता लगाना मुश्किल हो। द्वारका और दक्षिण-पश्चिम जिलों ने भी अवैध कॉल सेंटरों पर कार्रवाई की, जो देशभर के नागरिकों और व्यापारियों को निशाना बना रहे थे। विशेष प्रकोष्ठ की आईएफएसओ इकाई ने फर्जी और सामूहिक फोन कॉल करने में इस्तेमाल होने वाले छह सिम बॉक्स बरामद किए। इसके अलावा फर्जी निवेश लिंक और क्रिप्टोकरेंसी, ई-सिम तथा बैंक खातों की खरीद-फरोख्त से जुड़े टेलीग्राम चैनलों पर भी कार्रवाई की गई।
बरामदगी का बड़ा आंकड़ा, नकदी से क्रिप्टोकरेंसी तक जब्ती
ऑपरेशन साइहॉक-6.0 के दौरान दिल्ली पुलिस ने साइबर अपराध के नेटवर्क से जुड़े उपकरणों और संदिग्ध सामग्री की बड़ी खेप बरामद की। पुलिस के अनुसार कार्रवाई में 1,037 मोबाइल फोन, 1,301 सिम कार्ड, 106 लैपटॉप और कंप्यूटर, 397 एटीएम कार्ड, 244 से अधिक बैंक किट और पासबुक तथा 325 आधार कार्ड बरामद किए गए। इसके अलावा छह सिम बॉक्स, 11 कारें और 10 दोपहिया वाहन भी जब्त किए गए। पुलिस ने 37.67 लाख रुपये नकद के साथ सोना और क्रिप्टोकरेंसी (यूएसडीटी) भी बरामद की है। मध्य, उत्तर-पश्चिम, दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम जिलों ने ठगी की रकम से खरीदी गई संपत्ति और अपराध की कमाई का पता लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
4,979 संदिग्धों की जांच, छह अभियानों में 3,300 से ज्यादा गिरफ्तारियां
इस अभियान में दिल्ली के सभी 15 जिलों, अपराध शाखा की साइबर इकाई और विशेष प्रकोष्ठ की खुफिया फ्यूजन एवं रणनीतिक संचालन इकाई (आईएफएसओ) ने भाग लिया। राजधानी में 4,979 संदिग्धों को हिरासत में लेकर या रोककर उनकी पहचान और गतिविधियों का सत्यापन किया गया। दिल्ली पुलिस के मुताबिक ऑपरेशन साइहॉक के पिछले पांचवें चरण की तुलना में इस बार नए मुकदमों में करीब 24 प्रतिशत, निस्तारित साइबर शिकायतों में लगभग 46 प्रतिशत और दिल्ली से बाहर के राज्यों की शिकायतों पर कार्रवाई में करीब 57 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। ऑपरेशन के सभी छह चरणों में गिरफ्तारियों का आंकड़ा 3,300 से अधिक हो चुका है।
तकनीक और खुफिया जानकारी बनी पुलिस का हथियार
इस बार पुलिस ने कार्रवाई के लिए केवल स्थानीय सूचनाओं पर निर्भर रहने के बजाय विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म और आंकड़ों का इस्तेमाल किया। गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) से प्राप्त जानकारियों, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल की शिकायतों, समन्वय पोर्टल और प्रतिबिंब पोर्टल के डाटा का विश्लेषण किया गया। बैंक खातों, आईएफएससी कोड और मोबाइल नंबरों के बीच संबंधों की पहचान कर उन लोगों को चिन्हित किया गया, जिनका नाम कई साइबर ठगी की शिकायतों में सामने आ रहा था। आईएफएसओ ने बैंक, भुगतान गेटवे, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं और सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े मध्यस्थों के 70 से अधिक प्रतिनिधियों के साथ समन्वय बैठक भी की, ताकि डिजिटल गिरफ्तारी और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) से जुड़े धोखाधड़ी मामलों में सूचनाओं का आदान-प्रदान तेज किया जा सके।
आगे भी जारी रहेगा साइबर अपराध के खिलाफ अभियान
दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि ऑपरेशन साइहॉक को नियमित और खुफिया जानकारी आधारित अभियान के रूप में आगे भी जारी रखा जाएगा। दर्ज मामलों की जांच के दौरान विदेश में बैठे संचालकों और सरगनाओं की पहचान, ठगी की रकम का पूरा लेन-देन पता लगाने, अपराध से अर्जित संपत्ति जब्त करने और पीड़ितों की रकम वापस दिलाने की दिशा में प्रयास जारी रहेंगे।
नागरिकों के लिए दिल्ली पुलिस की अहम चेतावनी
दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की है कि कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, सिम कार्ड या बैंक किट किसी को न दें। ऐसा करने पर खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी में होने की स्थिति में खाताधारक भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकता है। केवाईसी अपडेट, क्यूआर कोड या साउंड बॉक्स ठीक करने के बहाने किसी अनजान व्यक्ति को अपना मोबाइल फोन न सौंपें। किसी को भी ओटीपी, पिन या बैंक कार्ड की जानकारी न दें। सोशल मीडिया पर निवेश, ऑनलाइन खरीदारी और आसान काम के बदले मोटा मुनाफा देने वाले प्रस्तावों से सावधान रहें। यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार होता है तो तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करे या www.cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट दर्ज कराए। समय पर शिकायत करने से ठगी की रकम को संबंधित बैंक खातों में फ्रीज कराने की संभावना बढ़ जाती है।