दिल्ली पुलिस की सोशल मीडिया पर सख्त कार्रवाई: पाकिस्तान से जुड़े फर्जी पोस्ट का खुलासा
दिल्ली में सोशल मीडिया पर बढ़ती दुष्प्रचार की निगरानी
नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने राजधानी में शांति और कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाले सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे दुष्प्रचार के खिलाफ अपनी निगरानी और कार्रवाई को तेज कर दिया है। फर्जी खबरें, भ्रामक दावे, झूठी फायरिंग की सूचनाएं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से निर्मित निराधार वीडियो के माध्यम से लोगों में डर और भ्रम फैलाने की कोशिशों पर पुलिस की पैनी नजर है। हाल ही में एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है कि एक सोशल मीडिया हैंडल के पंजीकरण विवरण की जांच के दौरान उसका आईपी पता पाकिस्तान का पाया गया। हालांकि, इस एक मामले के आधार पर सभी संदिग्ध हैंडल्स के विदेशी संचालन की पुष्टि नहीं की गई है। पुलिस अन्य मामलों की भी जांच कर रही है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हो रही है जब सोशल मीडिया पर एक झूठी सूचना भी तेजी से फैलकर आम जनता में घबराहट पैदा कर सकती है। पुलिस का कहना है कि भ्रामक सामग्री फैलाने वालों के खिलाफ तथ्यों की जांच, तकनीकी साक्ष्यों का संग्रहण और कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस की डिजिटल स्ट्राइक: अफवाहों पर नजर
अफवाहों की फैक्टरी पर पुलिस की डिजिटल स्ट्राइक
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त आईएफएसओ संजय भाटिया ने बताया कि दिल्ली पुलिस की टीमें सोशल मीडिया पर लगातार निगरानी रख रही हैं। संदिग्ध पोस्ट सामने आने पर उसकी सामग्री और दावों का सत्यापन किया जाता है। उचित जांच के बाद यदि कोई पोस्ट भ्रामक या सार्वजनिक शांति के लिए खतरा पैदा करने वाली पाई जाती है, तो नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाती है। उन्होंने बताया कि कुछ आपत्तिजनक पोस्ट को तुरंत हटवाने की कार्रवाई भी की गई है। जिन मामलों में प्रथम दृष्टया अपराध बनता दिखाई दिया, उनमें प्राथमिकी दर्ज की गई। जांच के दौरान संबंधित सोशल मीडिया खातों के पंजीकरण विवरण और अन्य तकनीकी जानकारियां प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन खातों का संचालन कहां से हो रहा है और इनके पीछे कौन लोग सक्रिय हैं.
पाकिस्तान से जुड़े आईपी पते की जांच जारी
एक आईपी पता पाकिस्तान का, बाकी मामलों की जांच जारी
जांच के दौरान एक मामले में संबंधित सोशल मीडिया हैंडल का पंजीकरण विवरण मांगे जाने पर उसका आईपी पता पाकिस्तान का पाया गया। पुलिस अब इस मामले से जुड़े अन्य तथ्यों और तकनीकी साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि क्या दूसरे संदिग्ध हैंडल्स के संचालन में भी विदेश से किसी प्रकार की भूमिका है। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त संजय भाटिया के मुताबिक अन्य मामलों में सोशल मीडिया मंचों और संबंधित एजेंसियों से आवश्यक जानकारी मांगी गई है। जांच पूरी होने और पर्याप्त साक्ष्य सामने आने के बाद ही दूसरे खातों के संचालन से जुड़ी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल जांच जारी है और पुलिस किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले उपलब्ध तथ्यों का सत्यापन कर रही है.
झूठी खबरों से दहशत फैलाने की कोशिश
फायरिंग हो रही है जैसी झूठी खबरों से दहशत फैलाने की कोशिश
पुलिस के सामने आए मामलों में गलत तथ्यों पर आधारित ऐसी पोस्ट भी शामिल हैं जिनमें फायरिंग होने जैसी घटनाओं के दावे किए जाते हैं। ऐसी खबरें बिना पुष्टि के प्रसारित होने पर लोगों में डर, भ्रम और अनावश्यक अफरातफरी पैदा कर सकती हैं। पुलिस का मानना है कि इस तरह की भ्रामक सामग्री के जरिए सार्वजनिक भावनाओं को भड़काने और शांति व्यवस्था को प्रभावित करने का प्रयास किया जा सकता है। इसके अलावा कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से तैयार किए गए वीडियो भी चिंता का विषय हैं। ऐसे वीडियो को वास्तविक घटना के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की जा सकती है जबकि उनकी सामग्री के पीछे ठोस तथ्य या प्रमाण नहीं होते। पुलिस इन वीडियो और पोस्ट की प्रामाणिकता की जांच कर रही है ताकि वास्तविक घटनाओं और भ्रामक डिजिटल सामग्री के बीच अंतर स्पष्ट किया जा सके.
भ्रामक पोस्ट पर नजर रखने की प्रक्रिया
रोजाना 50 से अधिक भ्रामक पोस्ट पर नजर
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त ने बताया कि रोजाना 50 से अधिक ऐसी पोस्ट सामने आती हैं जिनमें गलत या भ्रामक तथ्य होने की आशंका रहती है। दिल्ली पुलिस का मीडिया प्रकोष्ठ ऐसी सामग्री पर नजर रखता है, उसका सत्यापन करता है और जरूरत पड़ने पर लोगों को सचेत करने के लिए अलर्ट जारी करता है। पुलिस का उद्देश्य केवल आपत्तिजनक सामग्री पर कार्रवाई करना ही नहीं बल्कि आम नागरिकों को अफवाहों के प्रभाव से बचाना भी है। सोशल मीडिया पर किसी खबर के तेजी से प्रसारित होने का अर्थ यह नहीं है कि वह सही भी है। इसलिए पुलिस लोगों से अपील करती है कि किसी भी संवेदनशील सूचना को साझा करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच अवश्य करें.
भ्रामक सामग्री से जुड़े मामलों की संख्या
कई प्राथमिकी दर्ज, सटीक संख्या बताने से परहेज
पुलिस अधिकारियों के अनुसार भ्रामक और कथित रूप से आपराधिक सामग्री से जुड़े 180 से अधिक हैंडल पर पुलिस की नजर है, अब तक 80 अकाउंट ऐसे हैं जिनको ट्रैक कर लिया गया है। इस मामले में 6 से अधिक प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। हालांकि संबंधित मामलों की सटीक संख्या फिलहाल साझा नहीं की गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि संदिग्ध पोस्ट की पहचान तकनीकी विवरण जुटाने, संबंधित खातों की पड़ताल और साक्ष्यों के सत्यापन की प्रक्रिया लगातार जारी है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि भ्रामक सामग्री किसी व्यक्ति की ओर से साझा की गई है या इसके पीछे संगठित रूप से काम करने वाले खातों का नेटवर्क सक्रिय है। जांच के निष्कर्ष और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
जनता से अपील: अफवाहों पर विश्वास न करें
जनता से अपील—अफवाह नहीं, तथ्य पर करें भरोसा
संजय भाटिया ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाकर सार्वजनिक शांति भंग करने या लोगों को गुमराह करने की कोशिशों को गंभीरता से लिया जाएगा। हालांकि किसी पोस्ट के गलत होने या किसी खाते का आईपी पता विदेश में मिलने मात्र से उसके संचालक की आपराधिक भूमिका अपने आप साबित नहीं होती। इसके लिए जांच और साक्ष्यों का महत्वपूर्ण स्थान है। पुलिस की अपील है कि नागरिक बिना पुष्टि के फायरिंग, हिंसा या किसी अन्य संवेदनशील घटना से जुड़ी खबरें साझा न करें। संदिग्ध वीडियो और पोस्ट को आगे भेजने के बजाय उनकी जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाएं। जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार से ही अफवाहों के प्रसार को रोका जा सकता है। संदेश साफ है सोशल मीडिया पर झूठ की रफ्तार चाहे जितनी तेज हो, सच की जांच और कानून की कार्रवाई जारी रहेगी। राजधानी की शांति बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस डिजिटल मंचों पर फैलने वाले भ्रामक प्रचार के खिलाफ सतर्क है.