दिल्ली में CJP का तिरंगा मार्च: सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ी
CJP का तिरंगा मार्च और सुरक्षा चिंताएं
नई दिल्ली। शुक्रवार को दिल्ली के कनॉट प्लेस में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित 'लहरा दो तिरंगा' कार्यक्रम की तैयारी चल रही है। इस तिरंगा मार्च को लेकर खुफिया एजेंसियों में चिंता का माहौल है। एजेंसियों का मानना है कि यह कार्यक्रम केवल प्रतीकात्मक झंडा फहराने तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि यह अनिश्चितकालीन धरने में भी बदल सकता है। सूत्रों के अनुसार, यह मार्च जेल में बंद CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई की मांग को लेकर आयोजित किया जा रहा है।
सूत्रों ने बताया कि कार्यक्रम के समाप्त होने के बाद भी लोग वहां से जाने से इनकार कर सकते हैं। उन्होंने 20 जून के विरोध प्रदर्शन का उदाहरण दिया, जहां केवल शाम 5 बजे तक की अनुमति थी, लेकिन प्रदर्शन एक महीने से अधिक समय तक चलता रहा। हालांकि, एनडीएमसी ने 16 और 17 अक्टूबर को सेंट्रल पार्क को आम जनता के लिए बंद कर दिया है, फिर भी वहां लोगों के जुटने की संभावना बनी हुई है।
एजेंसियों की चिंताएं
सूत्रों के अनुसार, एजेंसियों को यह डर है कि CJP समर्थक सीधे सेंट्रल पार्क नहीं जाएंगे, बल्कि वे छोटे समूहों में अलग-अलग स्थानों पर इकट्ठा हो सकते हैं। इससे सेंट्रल और नई दिल्ली जिलों में भीड़ जमा हो सकती है। सोशल मीडिया का उपयोग लोगों को इकट्ठा करने और लाइव-स्ट्रीमिंग के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा, अंतिम समय में स्थान या मार्ग में बदलाव करने से भीड़ को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है, खासकर व्यस्त समय में।
मार्च की संभावित दिशा
यदि सेंट्रल पार्क में पाबंदियां लगाई जाती हैं, तो कुछ समूह संसद भवन, इंडिया गेट, राष्ट्रपति भवन, PMO, सुप्रीम कोर्ट, राजनीतिक दलों के दफ्तरों और वरिष्ठ जन-प्रतिनिधियों के आवासों की ओर मार्च करने की कोशिश कर सकते हैं। इन स्थानों के आसपास सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है।
इस आकलन में अव्यवस्था की चेतावनी भी दी गई है। सूत्रों का कहना है कि अत्यधिक भीड़, अफवाहें या उकसावे की स्थिति में धक्का-मुक्की या हाथापाई हो सकती है, जिससे सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंच सकता है। असामाजिक तत्व भी इस भीड़ का फायदा उठाकर गैर-कानूनी गतिविधियों को अंजाम दे सकते हैं। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने 14 अक्टूबर को इस कार्यक्रम की घोषणा की थी।
पिछले अनुभवों से मिली सीख
सूत्रों के अनुसार, खुफिया एजेंसियों को यह डर CJP के पिछले विरोध प्रदर्शनों के अनुभवों के आधार पर है। 10 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन के दौरान पथराव और पुलिसकर्मियों पर हमले की घटनाएं हुई थीं, जिसमें दो पुलिसकर्मी घायल हुए थे। 11 अक्टूबर को भी टकराव की घटनाएं सामने आईं। 20 जुलाई 2026 को आयोजकों ने कथित तौर पर BNSS की धारा 163 के तहत लागू निषेधाज्ञा का उल्लंघन किया।
सुरक्षा के लिए उठाए गए कदम
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नजर रखी जाएगी, ताकि लोगों को इकट्ठा करने के आह्वान और अंतिम समय में होने वाले किसी भी बदलाव का पता चल सके। रेलवे स्टेशनों, मेट्रो स्टेशनों और बस टर्मिनलों पर भी सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। नई दिल्ली और सेंट्रल जिलों में महत्वपूर्ण स्थानों और VIP इलाकों की सुरक्षा कड़ी की जाएगी।