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दिल्ली में ऑनलाइन ठगी का बड़ा खुलासा: 30 करोड़ रुपये के लेन-देन का नेटवर्क

दिल्ली में एक छात्रा से ऑनलाइन ठगी के मामले ने एक बड़े साइबर नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिसमें 30 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेन-देन शामिल हैं। पुलिस ने ग्रेटर नोएडा और कानपुर में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में फर्जी कंपनियों और बैंक खातों का जाल सामने आया है। जानें कैसे ठगी की गई और पुलिस की कार्रवाई के बारे में।
 

सोशल मीडिया पर ठगी का नया तरीका


नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर सस्ते कपड़ों के विज्ञापनों के जरिए ठगी का एक नया मामला सामने आया है। दिल्ली विश्वविद्यालय की एक छात्रा से 6,450 रुपये की ऑनलाइन धोखाधड़ी की शिकायत ने एक संगठित साइबर नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिसमें 30 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध बैंक लेन-देन का पता चला है। उत्तर जिला पुलिस ने दो हजार किलोमीटर तक फैली जांच के बाद ग्रेटर नोएडा और कानपुर में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अब तक इस नेटवर्क से संबंधित 27 साइबर ठगी की शिकायतें सामने आई हैं।


एक कुर्ती का ऑर्डर और ठगी की कहानी

फातिमा का अनुभव: प्रयागराज की रहने वाली फातिमा, जो दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज में पढ़ाई कर रही हैं, ने इंस्टाग्राम पर 'Kavya_kurti_hub' नामक एक विज्ञापन देखा। उन्होंने कुर्ती खरीदने के लिए व्हाट्सऐप पर संपर्क किया, जहां 799 रुपये का ऑर्डर दिया गया और 400 रुपये अग्रिम भुगतान किया गया। इसके बाद, पार्सल के लिए एक कॉल आई, जिसमें आरोपी ने पासकोड बनाने के लिए 1,150 रुपये, फिर 2,000, 2,650 और अंत में 650 रुपये की मांग की। न तो पार्सल मिला और न ही पैसे वापस हुए। इस पर फातिमा ने साइबर थाना उत्तर में 4 सितंबर 2026 को शिकायत दर्ज कराई।


पुलिस की जांच और गिरफ्तारी

जांच की प्रक्रिया: पुलिस ने 200 मोबाइल नंबरों और आईएमईआई नंबरों का विश्लेषण किया, जिससे ठगी की रकम ग्रेटर नोएडा की किजेनटेक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खाते से जुड़ी। तकनीकी निगरानी के बाद, 16 अक्टूबर को ग्रेटर नोएडा में छापेमारी कर छह आरोपियों को पकड़ा गया। आगे की जांच में 21 अक्टूबर को कानपुर से एक और आरोपी को गिरफ्तार किया गया।


फर्जी कंपनियों का जाल

आरोपियों की रणनीति: पुलिस के अनुसार, आरोपी फर्जी कंपनियां बनाकर चालू बैंक खाते खोलते थे। इन खातों से संबंधित बैंकिंग किट और सिम कार्ड अन्य लोगों को सौंपे जाते थे। जांच में किजेनटेक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, एग्जीक्यूटिव एज और नेक्सकोर नामक संस्थानों का पता चला है। आरोप है कि बैंक खाते उपलब्ध कराने के लिए लोगों को 25 हजार रुपये प्रति माह देने का लालच दिया जाता था।


गिरफ्तार आरोपियों की पहचान

मुख्य आरोपी: गिरफ्तार किए गए आरोपियों में 24 वर्षीय गौरव पांडेय, जो एमबीए डिग्रीधारी है, शामिल है। अन्य आरोपियों में आदित्य मिश्रा, आयुष वर्मा, अभिषेक पाल, राहुल कुमार, हिमांशु राणा और उदित प्रताप सिंह भदौरिया शामिल हैं।


पुलिस की कार्रवाई और बरामदगी

छापेमारी में मिली सामग्री: पुलिस ने आरोपियों के पास से 20 मोबाइल फोन, 45 सिम कार्ड, 28 चेकबुक, 33 डेबिट कार्ड, 39 पीओएस मशीनें, 15 स्कैनर, दो लैपटॉप, पांच मुहरें, सात आधार कार्ड, पांच पैन कार्ड और बैंक खातों से संबंधित 21 दस्तावेज बरामद किए हैं।


पुलिस की जांच जारी

जारी जांच: पुलिस अब जब्त किए गए मोबाइल फोन, सिम कार्ड और बैंकिंग दस्तावेजों की जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, संदिग्ध खातों में 30 करोड़ रुपये से अधिक के लेन-देन का पता चला है। डीसीपी ने ऑनलाइन खरीदारी करते समय अनजान सोशल मीडिया खातों से सावधान रहने की सलाह दी है।