दिल्ली में तलाक के कागज़ फाड़कर रिश्ते की नई परिभाषा लिखी गई
एक अनोखी कहानी
नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर एक वायरल वीडियो ने लोगों का ध्यान खींचा है, जिसमें एक पत्नी ने तलाक के कागज़ फाड़ दिए। यह घटना दर्शाती है कि रिश्तों का अंत हमेशा अदालत में नहीं होना चाहिए, बल्कि अपनापन से भी हो सकता है।
शिखा सिंह की शादी सौरभ से 2020 में हुई थी। शादी के कुछ समय बाद उनके बीच तनाव बढ़ गया, जिसके चलते शिखा ने सौरभ पर दहेज का मामला दर्ज किया। इस कानूनी लड़ाई के कारण शिखा के पिता की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई, और उन्हें इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में भर्ती होना पड़ा।
कभी-कभी एक सच्चा रिश्ता अदालत के फैसलों से नहीं, इंसानियत के एक फैसले से बच जाता है…
दिल्ली- शिखा और सौरभ की शादी 2020 में हुई थी। रिश्ते में दरार आई, आरोप लगे, दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज हुआ और बात कोर्ट तक पहुंच गई। तारीख़ों और कानूनी लड़ाई के बीच सिर्फ रिश्ता ही नहीं टूटा,… pic.twitter.com/1kkyStL4vv
— निशीकांत त्रिवेदी
(@nishikantlive) June 12, 2026
रिश्तों की अहमियत
जब सौरभ को यह खबर मिली, तो उसने अपने अहंकार को छोड़कर अस्पताल जाकर अपने ससुर का इलाज करवाया। आज शिखा के पिता स्वस्थ हैं। जब शिखा अगली सुनवाई के लिए कोर्ट पहुंचीं, तो उन्होंने तलाक के कागज़ फाड़ दिए और सौरभ को गले लगा लिया। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि रिश्ते कभी-कभी अहंकार से टूटते हैं, लेकिन इंसानियत उन्हें फिर से जोड़ देती है।
रिश्तों की सच्चाई
कभी-कभी कठिन समय यह दिखाता है कि रिश्ते शिकायतों से नहीं, बल्कि अपनापन और एहसान से बंधे होते हैं। केस लड़ना आसान है, लेकिन रिश्ते निभाना कठिन। जब एक साथी इंसानियत दिखाता है, तो सभी कानूनी दस्तावेज़ खुद-ब-खुद महत्व खो देते हैं।