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दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए नई इलेक्ट्रिक बसें और वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र

दिल्ली में प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए सरकार ने नई इलेक्ट्रिक बसों और वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों की स्थापना की है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री और मुख्यमंत्री ने नई बसों को हरी झंडी दिखाई, जबकि प्रदूषण नियंत्रण के लिए एकीकृत नियंत्रण केंद्र भी स्थापित किया गया है। इस पहल का उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन को स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है। जानें इस योजना के तहत क्या-क्या किया जा रहा है और भविष्य के लक्ष्य क्या हैं।
 

दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए नई पहल


नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। हाल ही में, 150 नई इलेक्ट्रिक बसों को सड़कों पर उतारा गया है, जबकि हवा की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए 13 नए वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र स्थापित किए गए हैं। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आनंद विहार अंतरराज्यीय बस अड्डे से इन नई बसों को हरी झंडी दिखाई। इसके साथ ही, शास्त्री पार्क में प्रदूषण नियंत्रण समिति का एकीकृत नियंत्रण केंद्र भी स्थापित किया गया है, जिससे प्रदूषण की निगरानी में सुधार हुआ है।


परिवहन और तकनीक का समन्वय


मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए परिवहन, तकनीक और बुनियादी ढांचे पर एक साथ काम किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन को अधिक स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि एकीकृत नियंत्रण केंद्र प्रदूषण के खिलाफ एक युद्ध कक्ष की तरह कार्य कर रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कैमरों और वास्तविक समय के आंकड़ों का उपयोग करते हुए 700 से अधिक निर्माण स्थलों, सड़क सफाई और खुले में कचरा जलाने जैसी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। नए केंद्रों के साथ, अब निगरानी केंद्रों की कुल संख्या 60 हो गई है।


इलेक्ट्रिक बसों की संख्या में वृद्धि, लक्ष्य 14,000 बसें


परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह के अनुसार, नई बसों के जुड़ने से दिल्ली में इलेक्ट्रिक बसों की कुल संख्या 5,238 हो गई है। राजधानी के बस बेड़े में लगभग 6,988 बसें शामिल हैं। इसके अलावा, पांच स्थानों पर विद्युत वाहन चार्जिंग केंद्र भी स्थापित किए गए हैं। सरकार का लक्ष्य वित्त वर्ष 2028-29 तक बसों की संख्या को लगभग 14,000 तक पहुंचाना है। अब चुनौती यह है कि इन योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए ताकि दिल्लीवासियों को प्रदूषण से राहत मिल सके।