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दिल्ली में बड़े बैंक फ्रॉड का पर्दाफाश: ईडी ने 26 ठिकानों पर मारा छापा

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिल्ली और अन्य शहरों में 26 ठिकानों पर छापे मारे हैं, जिसमें तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड पर 290 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी का आरोप है। जांच में कई कंपनियों और सरकारी कार्यालयों की भूमिका भी सामने आई है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और ईडी की कार्रवाई के पीछे की कहानी।
 

प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई


नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने करोड़ों रुपये के कथित बैंक धोखाधड़ी और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने के मामले में महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत दिल्ली, मोहाली, चंडीगढ़, पंचकूला और लुधियाना में 26 स्थानों पर तलाशी और सर्वेक्षण शुरू किया है।


तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स पर जांच

तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स और संबंधित कंपनियां निशाने पर


यह कार्रवाई तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटरों, निदेशकों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के परिसरों पर की जा रही है। जांच में रेमिगेट बिल्डएस्टेट्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड, एमबी इंफ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड, मेरा बाबा रियलिटी एसोसिएट्स प्राइवेट लिमिटेड और मेरा बाबा इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड भी शामिल हैं।


290 करोड़ रुपये का बैंक फ्रॉड

290 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड का आरोप


ईडी के अनुसार, तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स से जुड़ा मामला सीबीआई और ईडी की जांच के दायरे में है, जिसमें पश्चिम विहार स्थित रेडिसन ब्लू होटल परियोजना से संबंधित लगभग 290 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है।


संदिग्ध लाभ की जांच

जीएमएडीए नीलामी संपत्तियों में संदिग्ध लाभ


जांच में यह भी सामने आया है कि संबंधित प्रमोटरों का नियंत्रण उन कंपनियों पर है, जिन्होंने मोहाली में ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (जीएमएडीए) की दो प्रमुख नीलामी संपत्तियां हासिल की थीं। इसके बाद प्राधिकरण को देय राशि में कथित तौर पर बड़ी वित्तीय राहत प्राप्त की गई। ईडी को संदेह है कि कंपनियों को हुए संदिग्ध लाभ और सरकारी खजाने को हुए नुकसान की राशि 100 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।


सरकारी कार्यालयों में सर्वे

सरकारी कार्यालयों में सर्वे और मध्यस्थ कंपनी


इसके साथ ही, जीएमएडीए और पंजाब सरकार के आवास एवं शहरी विकास विभाग के कार्यालयों में पीएमएलए की धारा 16 के तहत सर्वेक्षण किया जा रहा है। टीला कंसल्टेंट्स एंड कॉन्ट्रैक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड भी जांच के दायरे में है, जिसे कथित तौर पर मध्यस्थ की भूमिका निभाने का संदेह है।