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दिल्ली में साइबर ठगी का बड़ा खुलासा: चार लाख रुपये की धोखाधड़ी में तीन गिरफ्तार

दिल्ली में एक व्यक्ति को कूरियर का पता अपडेट करने के नाम पर साइबर ठगों ने चार लाख रुपये की धोखाधड़ी का शिकार बना दिया। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो फर्जी ईंधन कार्डों के माध्यम से ठगी की रकम को नकद में बदलने का काम कर रहे थे। जांच में पता चला है कि इस नेटवर्क से जुड़े संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की राशि 10 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। जानें इस मामले की पूरी कहानी और पुलिस की कार्रवाई के बारे में।
 

साइबर ठगी का मामला


नई दिल्ली: एक व्यक्ति को कूरियर का पता अपडेट करने के बहाने भेजे गए एक संदेश ने लगभग चार लाख रुपये की धोखाधड़ी का शिकार बना दिया। साइबर अपराधियों ने पहले उसके मोबाइल में एक खतरनाक एपीके फाइल भेजी और फिर महज दो रुपये के भुगतान के बहाने उसकी बैंकिंग जानकारी चुरा ली। इसके बाद, उसके खाते से लाखों रुपये निकाल लिए गए। हालांकि, इस बार पुलिस ने जल्दी ही कार्रवाई की और दक्षिण-पूर्व जिला पुलिस की साइबर टीम ने तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया है।


गिरफ्तार आरोपियों की पहचान

दक्षिण-पूर्वी जिला के डीसीपी विनीत कुमार ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में नासिर हुसैन, सोकीन और आशीष आर्य शामिल हैं। जांच में यह सामने आया कि ठगी से प्राप्त धनराशि को फर्जी एचपीसीएल ड्राइव ट्रैक प्लस ईंधन कार्डों के माध्यम से नकद में बदला जा रहा था। पुलिस ने अब तक 113 संदिग्ध ईंधन कार्डों की पहचान की है और अनुमान है कि इनसे जुड़े वित्तीय लेनदेन की राशि लगभग 10 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।


कैसे हुई ठगी?

यह घटना 7 मई 2026 को हुई। शिकायतकर्ता जितेंद्र कुमार गुप्ता को कूरियर डिलीवरी का पता अपडेट करने के नाम पर एक व्हाट्सऐप संदेश मिला, जिसमें एक एपीके फाइल भेजी गई थी। फाइल खोलने के बाद, उनसे एचडीएफसी नेट बैंकिंग की जानकारी मांगी गई और दो रुपये का भुगतान करने के लिए कहा गया। इसके बाद उनके खाते से 3,97,018.88 रुपये की अनधिकृत निकासी हुई। इस मामले में साइबर थाना में ई-एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।


फर्जी ईंधन कार्ड का जाल

जांच के दौरान पता चला कि निकाली गई राशि को एचपीसीएल ड्राइव ट्रैक प्लस ग्राहक पहचान संख्या 4002211199 में इस्तेमाल किया गया था। इस पहचान संख्या से जुड़े ट्रक नंबरों की जांच में करीब 15 लाख रुपये के लेनदेन का खुलासा हुआ। पुलिस ने मोबाइल नंबर, सिम जारी करने वाले केंद्र और अन्य दस्तावेजों की गहन जांच शुरू की।


सोकीन की पहचान

जांच के दौरान संदिग्ध ईंधन कार्ड की वीडियो केवाईसी से सोकीन की पहचान हुई। इसके बाद पुलिस ने कई स्थानों पर जांच की और नासिर हुसैन को राजस्थान के खैरथल-तिजारा जिले से गिरफ्तार किया। नासिर और सोकीन को 28 सितंबर को पकड़ा गया।


आशीष आर्य की भूमिका

जांच में आशीष आर्य का नाम भी सामने आया, जो ट्राइस्टार मैनेजमेंट सर्विसेज में पूर्व कार्यकारी रह चुका है। उसने स्वीकार किया कि उसने बिना भौतिक जांच के ईंधन कार्ड का पंजीकरण किया था। पुलिस के अनुसार, ट्रक मालिकों से जानकारी हासिल करने के लिए ब्लैकबक परिवहन मंच का उपयोग किया जाता था।


धोखाधड़ी का नेटवर्क

जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से ईंधन कार्डों का पंजीकरण किया जाता था। वीडियो केवाईसी के बाद इन कार्डों में साइबर ठगी की राशि डाली जाती थी, जिसे पेट्रोल पंपों पर नकद में बदला जाता था।


पुलिस की कार्रवाई

पुलिस ने नासिर हुसैन से तीन और सोकीन से दो मोबाइल फोन बरामद किए हैं। जब्त मोबाइलों में कई सिम कार्ड भी मिले हैं। नासिर के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी से संबंधित मामले दर्ज हैं।


जांच जारी

पुलिस अब 10 करोड़ रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है। इसके अलावा, अन्य ईंधन कार्डों और साइबर ठगी में शामिल अन्य व्यक्तियों की पहचान की जा रही है। यह कार्रवाई साइबर थाना दक्षिण-पूर्व जिला की टीम द्वारा की जा रही है।