नशे के खिलाफ नई रणनीति: ड्रग्स के नेटवर्क पर वार करने की तैयारी
नई दिल्ली में एंटी-नारकोटिक्स सम्मेलन
नई दिल्ली: नशे के खिलाफ लड़ाई अब केवल ड्रग्स की बरामदगी तक सीमित नहीं रह गई है। इसके पीछे के नेटवर्क, आर्थिक तंत्र और अंतरराज्यीय व अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भी निशाना बनाने की योजना बनाई जा रही है। दिल्ली में आयोजित तीसरे राष्ट्रीय एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) सम्मेलन ने इसी नई रणनीति को उजागर किया। इस दो दिवसीय सम्मेलन के समापन पर 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने नारकोटिक्स नियंत्रण विजन दस्तावेज 2026-29 को लागू करने और नशे के खिलाफ सामूहिक प्रयासों को तेज करने का संकल्प लिया।
इस सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 22 सितंबर को किया। सम्मेलन की थीम 'एकजुट संकल्प, साझा जिम्मेदारी' रखी गई थी। गृह मंत्री ने नशे के कारोबार के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर देते हुए 31 दिसंबर 2029 तक देश को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य रखा।
नशे के नेटवर्क पर ध्यान केंद्रित
जब्ती नहीं, पूरे नेटवर्क पर वार
सम्मेलन में यह स्पष्ट किया गया कि अब कार्रवाई का ध्यान केवल मादक पदार्थों की बरामदगी के आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा। जांच एजेंसियां ड्रग नेटवर्क, तस्करी के सरगनाओं और संगठित गिरोहों के वित्तीय तंत्र तक पहुंचने पर जोर देंगी। राज्यों की एएनटीएफ को मजबूत करने के लिए खुफिया सूचनाओं के बेहतर आदान-प्रदान और विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल बढ़ाने पर विशेष चर्चा हुई। वित्तीय प्रोफाइलिंग और संगठित तस्करी नेटवर्क के मुख्य संचालकों के खिलाफ अभियोजन को भी रणनीति में शामिल किया गया।
नशामुक्ति और पुनर्वास की योजना
नशामुक्त परिसर से पुनर्वास तक पूरा प्लान
सम्मेलन में यह भी स्वीकार किया गया कि नशे के खिलाफ लड़ाई में केवल प्रवर्तन कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। रोकथाम, जागरूकता, मांग में कमी और नशामुक्ति एवं पुनर्वास को भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाएगा। उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए यूजीसी के 'नशामुक्त परिसर ढांचे', शिक्षण संस्थानों के आसपास 500 मीटर के दायरे में ड्रग-फ्री जोन, नशामुक्त भारत अभियान और नशामुक्ति केंद्रों की क्षमता बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई।
नई चुनौतियों का सामना
डार्कनेट, क्रिप्टो और सिंथेटिक ड्रग्स बनी नई चुनौती
सम्मेलन के दूसरे दिन अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और इंटरपोल के साथ बेहतर समन्वय, विदेश भागे आरोपियों के प्रत्यर्पण, वित्तीय जांच और डिजिटल तकनीक के उपयोग पर चर्चा हुई। निदान, ई-साक्ष्य, ई-प्रिजन और सीसीटीएनएस जैसे डिजिटल डेटाबेस के प्रभावी उपयोग, नार-के9 की मदद से खुफिया आधारित कार्रवाई और सिंथेटिक ड्रग्स की उन्नत जांच पर भी विचार किया गया। इसके साथ ही प्रीकर्सर रसायनों की अवैध आपूर्ति, गुप्त ड्रग लैब, डार्कनेट और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए होने वाले नशे के अपराधों के खिलाफ रणनीति तैयार करने पर जोर दिया गया।
रेलवे के जरिए नशे की तस्करी
रेलवे के रास्ते नशे पर भी नजर
सम्मेलन के दौरान रेलवे के माध्यम से मादक पदार्थों की तस्करी पर भी चर्चा की गई। एनसीबी के महानिदेशक ने बताया कि रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने नारकोटिक्स सेल गठित किया है। एनसीबी और आरपीएफ के बीच प्रस्तावित समझौता ज्ञापन के जरिए प्रशिक्षण, सूचना साझा करने और संयुक्त अभियानों को संस्थागत रूप देने की योजना है।
राज्यों के लिए एक्शन प्लान
हर राज्य का अपना तीन वर्षीय एक्शन प्लान
समापन सत्र में एनसीबी महानिदेशक ने राज्यों से अपने-अपने क्षेत्र की चुनौतियों और जरूरतों के आधार पर 2026 से 2029 तक का तीन वर्षीय रोडमैप तैयार करने का आह्वान किया। राष्ट्रीय विजन दस्तावेज के अनुरूप राज्य स्तर पर लक्ष्य, समयसीमा और निगरानी व्यवस्था तय करने पर जोर दिया गया। सम्मेलन में विभिन्न राज्यों द्वारा नशे के खिलाफ अपनाई गई तकनीक आधारित, बहुस्तरीय और सामुदायिक भागीदारी वाली कार्यप्रणालियों को भी साझा किया गया। संदेश स्पष्ट है कि नशे की एक खेप पकड़ना मंजिल नहीं, बल्कि उस पूरे नेटवर्क तक पहुंचना असली लक्ष्य है, जो नशे के कारोबार को जिंदा रखता है।