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नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर: INDIA गठबंधन से एनडीए में वापसी का रहस्य

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में एनडीए में वापसी की है, जबकि वे पहले विपक्षी एकता के प्रमुख चेहरे थे। जदयू के संजय झा ने बताया कि कैसे ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल के प्रस्ताव ने गठबंधन की एकता को प्रभावित किया। जानें इस राजनीतिक बदलाव के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
 

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का राजनीतिक परिवर्तन


पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार वर्तमान में एनडीए के महत्वपूर्ण सहयोगी हैं, जबकि कुछ समय पहले वे विपक्षी एकता के प्रमुख चेहरे थे। उन्होंने विभिन्न नेताओं के साथ मिलकर INDIA गठबंधन की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।


हालांकि, एक बैठक के बाद उन्होंने इस गठबंधन को छोड़कर भाजपा के साथ फिर से जुड़ने का निर्णय लिया। आखिर ऐसा क्या हुआ कि नीतीश का मन बदल गया? इस बारे में जदयू के कार्यवाहक राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा ने जानकारी दी है।


गठबंधन की सहमति का समय

संजय झा ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बताया कि 2023 की शुरुआत में विपक्षी दलों के बीच सहमति बनी थी कि नीतीश कुमार को गठबंधन का संयोजक बनाया जाएगा। कांग्रेस भी इस पर सहमत थी। नीतीश ने प्रधानमंत्री पद की दावेदारी नहीं की, लेकिन संयोजक की भूमिका पर सभी ने सहमति जताई।


दो नेताओं ने बदली पूरी तस्वीर

झा के अनुसार, दिल्ली या मुंबई में हुई एक बैठक में ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल ने नया प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने सुझाव दिया कि संयोजक किसी दलित नेता को होना चाहिए और मल्लिकार्जुन खरगे का नाम रखा। झा का कहना है कि यह प्रस्ताव रणनीतिक रूप से रखा गया था, जिससे कांग्रेस भी पीछे हट गई और स्थिति बिगड़ गई।


उन्होंने कहा कि नीतीश को पद की लालसा नहीं थी, लेकिन जब एक बार बात तय हो जाए तो उसे बदलना उचित नहीं लगता। झा ने आरोप लगाया कि केवल दो व्यक्तियों के कारण पूरे गठबंधन की एकता टूट गई। इसके बाद स्थिति और बिगड़ती गई।


पटना बैठक से लेकर पाला बदलने तक

नीतीश कुमार ने 2023 में भाजपा का साथ छोड़कर महागठबंधन की सरकार बनाई थी। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष को एकजुट करने के लिए देशभर का दौरा किया। 23 जून 2023 को पटना में विपक्षी दलों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई जिसमें लगभग सभी नेता शामिल हुए। इसी प्रक्रिया से INDIA गठबंधन का गठन हुआ।


हालांकि, दिसंबर 2023 तक नीतीश के फिर से पाला बदलने की चर्चा शुरू हो गई। जनवरी 2024 में राजनीतिक हलचल तेज हुई और 28 जनवरी को नीतीश ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। महागठबंधन टूट गया और भाजपा के समर्थन से उन्होंने फिर से सरकार बनाई। इस्तीफे के बाद नीतीश ने कहा कि गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था और कार्यकर्ताओं की राय थी कि अलग हो जाना चाहिए।


गठबंधन पर पड़ा असर

नीतीश के जाने के बाद INDIA गठबंधन कमजोर हो गया। लोकसभा चुनाव तक सीट बंटवारे पर सहमति नहीं बन पाई। बंगाल में ममता ने कांग्रेस को सीट नहीं दी, जबकि पंजाब में केजरीवाल ने अकेले चुनाव लड़ा।


दिल्ली में गठबंधन था, लेकिन पंजाब में अलग-अलग लड़ने से गठबंधन की साख को नुकसान हुआ। चुनाव परिणामों में भाजपा को झटका लगा, लेकिन विपक्ष भी ज्यादा लाभ नहीं उठा सका। इस बीच, नीतीश कुमार अब एनडीए सरकार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं।