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पंजाब के स्कूलों में नशामुक्ति अभियान: शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका

पंजाब में स्कूलों में नशामुक्ति अभियान के तहत शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में चल रहे इस अभियान में प्रशिक्षित शिक्षक बच्चों को नशे के खतरों से अवगत कराते हुए मानसिक स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता दे रहे हैं। सरकार ने इस पहल को मजबूत करने के लिए कई कार्यक्रमों की शुरुआत की है, जिसमें माइंडफुलनेस प्रोग्राम और एविडेंस-आधारित एंटी-ड्रग पाठ्यक्रम शामिल हैं। इस अभियान का उद्देश्य बच्चों को नशे से सुरक्षित रखना और उन्हें सही निर्णय लेने के लिए सशक्त बनाना है।
 

पंजाब में नशामुक्ति की नई पहल


चंडीगढ़: गर्मी की छुट्टियों के बाद पंजाब के स्कूल फिर से खुलने पर, हजारों शिक्षक राज्य को नशामुक्त बनाने के प्रयास में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।


यह लड़ाई अब पुलिस थानों और नशा मुक्ति केंद्रों से आगे बढ़कर स्कूलों तक पहुँच गई है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में चल रहे 'युद्ध नशेआं विरुद्ध' अभियान के तहत, प्रशिक्षित शिक्षक और जागरूक प्रधानाचार्य मिलकर बच्चों के चारों ओर सुरक्षा का एक मजबूत कवच बना रहे हैं। बच्चों को नशे के खतरों के बारे में जानकारी देने के साथ-साथ मानसिक तनाव से निपटने के कौशल भी सिखाए जा रहे हैं।


पंजाब सरकार का निवेश

पंजाब सरकार उन लोगों में निवेश कर रही है जो प्रतिदिन किशोरों के संपर्क में रहते हैं। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज़ के सहयोग से, नौ जिलों के 1,400 से अधिक स्कूल प्रमुखों को प्रशिक्षित किया गया है ताकि वे नशे के शुरुआती संकेतों को पहचान सकें और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर तरीके से संभाल सकें।


अमृतसर में कक्षा 9 से 12 तक के 3,000 से अधिक शिक्षकों के लिए कैपेसिटी बिल्डिंग वर्कशॉप आयोजित की गई हैं। इस प्रशिक्षण के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, जिसमें 75% शिक्षकों ने स्वस्थ स्कूल वातावरण बनाने की प्रेरणा प्राप्त की है।


माइंडफुलनेस प्रोग्राम

राज्य भर के सरकारी स्कूलों में 'माइंडफुलनेस प्रोग्राम' शुरू किया गया है, जिसमें कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों के लिए रोज़ाना 30 मिनट का सत्र होता है। इस कार्यक्रम में साँस लेने के अभ्यास, मेडिटेशन और सकारात्मक विचारों का समावेश किया गया है।


मोहाली के 210 सरकारी स्कूलों में इस कार्यक्रम का पायलट रूप से कार्यान्वयन किया गया है, जिसमें 83% छात्रों ने कहा है कि वे कठिन परिस्थितियों को बेहतर तरीके से संभाल पा रहे हैं।


स्वास्थ्य मंत्री का बयान

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने इस पहल के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि नशे से बचाए गए हर बच्चे को सुरक्षित भविष्य मिलता है।


पंजाब ने कक्षा 9 से 12 के छात्रों के लिए भारत का पहला एविडेंस-आधारित एंटी-ड्रग पाठ्यक्रम शुरू किया है, जिसमें 3,658 स्कूलों के लगभग 8 लाख छात्र शामिल हैं।


शिक्षकों की भूमिका

अमृतसर के एक सरकारी स्कूल की शिक्षिका बलविंदर कौर ने कहा कि बच्चों से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिल रही है। छात्र कक्षा में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं, जिससे यह विश्वास होता है कि वे नशे की समस्या से दूर रहेंगे।


पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि यह पहल सरकार की युवा पीढ़ी को सुरक्षित बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।


नशे के खिलाफ लड़ाई

पंजाब ने नशे के खिलाफ लड़ाई में एक नई मिसाल पेश की है, यह दिखाते हुए कि नशे पर रोक केवल कानून से नहीं, बल्कि जागरूकता और समय पर रोकथाम से भी संभव है।