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पंजाब में किसानों की नहरी पानी की मांग पूरी, नई पहल से सिंचाई प्रणाली में सुधार

पंजाब में किसानों की लंबे समय से चली आ रही नहरी पानी की मांग को पूरा करने के लिए सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने विधानसभा में बताया कि नहरों और खालों को बहाल कर टेलों, टिब्बों और पहाड़ी क्षेत्रों में पानी पहुंचाया जा रहा है। इस पहल से न केवल भूजल का संरक्षण होगा, बल्कि कृषि के भविष्य को भी सुरक्षित किया जाएगा। जानें इस नई योजना के बारे में और कैसे यह किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगी।
 

पंजाब में नहरी पानी की उपलब्धता


19,316 खाल बहाल, 1,687 स्थानों पर नहरी पानी की पहली बार पहुंच


चंडीगढ़: पंजाब सरकार ने खेतों में सिंचाई के लिए नहरी पानी की उपलब्धता को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। जल संसाधन एवं भूमि संरक्षण मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने विधानसभा में बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में नहरों और खालों को बहाल किया गया है, जिससे टेलों, टिब्बों और पहाड़ी क्षेत्रों में नहरी पानी पहुंचाया जा रहा है।


गोयल ने कहा कि यह कदम पंजाब के भूजल संरक्षण और कृषि के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उठाए गए हैं। यह प्रस्ताव विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित हुआ।


पंजाब का राष्ट्रीय अन्न पूल में योगदान

बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि पंजाब ने कृषि संसाधनों का बड़े पैमाने पर उपयोग कर देश की खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हालांकि, भूजल पर निर्भरता के कारण जल संसाधनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। मान सरकार ने नहरी पानी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए एक स्पष्ट रणनीति अपनाई है।


उन्होंने बताया कि 19,316 खाल बहाल किए गए हैं और 1,687 स्थानों पर पहली बार नहरी पानी पहुंचाया गया है।


नहरी नेटवर्क को मजबूत करने की आवश्यकता

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि किसानों के लिए सिंचाई के विश्वसनीय साधनों को सुनिश्चित करने के लिए नहरी नेटवर्क को मजबूत करना आवश्यक है। पुरानी व्यवस्था में किसानों को खालों और भूमिगत पाइपलाइनों की लागत का 10 प्रतिशत देना पड़ता था, जबकि 90 प्रतिशत खर्च सरकार उठाती थी।


कई किसान अपने हिस्से का भुगतान नहीं कर पाते थे, जिससे कई परियोजनाएं रुक जाती थीं। गोयल ने बताया कि 2023 में मान सरकार ने किसानों के 10 प्रतिशत योगदान को माफ कर दिया और पूरी लागत वहन करने का वादा किया, जिससे वित्तीय बाधाएं दूर हुईं और खालों की बहाली में तेजी आई।